राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस को झटका, कई राज्यों में क्रॉस वोटिंग ने खोली संगठन की पोल

राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस को झटका, कई राज्यों में क्रॉस वोटिंग ने खोली संगठन की पोल

राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस को झटका, कई राज्यों में क्रॉस वोटिंग ने खोली संगठन की पोल
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 19, 2026, 10:31:00 AM

हालिया राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस को कई राज्यों में अपने ही विधायकों की असहमति का सामना करना पड़ा है। पार्टी के निर्देशों के विपरीत मतदान की घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि विपक्ष में रहने के दौरान कांग्रेस को चुनावी प्रबंधन और आंतरिक अनुशासन बनाए रखने में लगातार मुश्किलें आ रही हैं।

हरियाणा में कांग्रेस के पांच विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग जाकर मतदान किया, जबकि चार मत रद्द घोषित कर दिए गए। इस पर कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि रिटर्निंग अधिकारी ने निष्पक्ष भूमिका नहीं निभाई। ओडिशा में भी तीन विधायकों के अलग रुख अपनाने से पार्टी समर्थित उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। बिहार में स्थिति अलग रही, जहां कांग्रेस के तीन विधायक मतदान से ही दूर रहे, जिससे सहयोगी दलों को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिन राज्यों में कांग्रेस सत्ता से बाहर है, वहां राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों के दौरान इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं। इसके पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं—सत्तारूढ़ दलों का प्रभाव और पार्टी के भीतर मौजूद खींचतान।

निराशा और आंतरिक कलह का असर

हालांकि हरियाणा में कांग्रेस इस बार सीट जीतने में सफल रही, लेकिन बिहार और ओडिशा में सहयोगी दलों को लाभ पहुंचाने की उसकी रणनीति असफल रही। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार चुनावी हार और सत्ता से दूर रहने के कारण पार्टी के कई विधायकों में हताशा बढ़ी है, जिससे वे विरोधी दलों के प्रभाव में आने के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। ओडिशा और बिहार की घटनाओं को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
हरियाणा में भी गुटबाजी एक अहम कारक रही। अतीत में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां पार्टी से अलग रुख अपनाने वाले विधायक बाद में राजनीतिक पाला बदल चुके हैं।

प्रलोभन और दबाव की भूमिका

पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सत्तारूढ़ पक्ष द्वारा दिए जाने वाले आर्थिक प्रलोभनों और संभावित दबावों का असर भी इन घटनाओं में दिखाई देता है। जिन विधायकों के निजी या व्यावसायिक हित जुड़े होते हैं, वे इस तरह के दबावों के प्रति अधिक संवेदनशील माने जाते हैं।

इन चुनौतियों के बावजूद हरियाणा में कांग्रेस की जीत को संगठनात्मक मजबूती और नेतृत्व की प्रभावशीलता का परिणाम माना जा रहा है। हालांकि, अन्य राज्यों में सामने आई घटनाओं ने पार्टी के सामने अनुशासन और एकजुटता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।