झारखंड की राजनीति में बढ़ी हलचल, कांग्रेस पर्यवेक्षकों ने हेमंत सोरेन से की अहम मुलाकात

झारखंड की राजनीति में बढ़ी हलचल, कांग्रेस पर्यवेक्षकों ने हेमंत सोरेन से की अहम मुलाकात

झारखंड की राजनीति में बढ़ी हलचल, कांग्रेस पर्यवेक्षकों ने हेमंत सोरेन से की अहम मुलाकात
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jun 06, 2026, 5:51:00 PM

झारखंड की राजनीति में सीटों के तालमेल और गठबंधन के भीतर कथित मतभेदों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच शनिवार को कांग्रेस नेतृत्व ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पार्टी के विशेष पर्यवेक्षक भूपेश बघेल और अजय शर्मा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके आवास पर विस्तृत चर्चा की। इस मुलाकात को आगामी चुनावी रणनीति और गठबंधन सहयोगियों के बीच बेहतर समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में पिछले कुछ दिनों से उम्मीदवारों के चयन और सीटों के बंटवारे को लेकर अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। ऐसे माहौल में हुई यह बैठक महागठबंधन की ओर से एकता का संदेश देने वाली मानी जा रही है। बैठक के बाद कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिया कि सहयोगी दलों के बीच किसी प्रकार का गंभीर मतभेद नहीं है और सभी मुद्दों पर सकारात्मक संवाद हुआ है।

मीडिया से बातचीत करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि किसी भी बड़े राजनीतिक दल में कार्यकर्ताओं और नेताओं की अपनी-अपनी राय होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विभिन्न मत सामने आते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व द्वारा लिया जाता है और संगठन उसी दिशा में आगे बढ़ता है। उनके अनुसार, गठबंधन के घटक दलों के बीच अब किसी तरह की गलतफहमी की स्थिति नहीं है।

कांग्रेस पर्यवेक्षकों ने यह भी स्पष्ट किया कि झारखंड में कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा का संबंध केवल चुनावी गणित तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सुव्यवस्थित और पूर्व निर्धारित राजनीतिक साझेदारी है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक रही, जिसमें विभिन्न राजनीतिक पहलुओं पर खुलकर चर्चा की गई।

बैठक के बाद कांग्रेस नेताओं ने विश्वास जताया कि आगामी चुनावों में महागठबंधन मजबूत प्रदर्शन करेगा। उनका कहना था कि गठबंधन के सभी सहयोगी दल भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे और दोनों सीटों पर जीत हासिल करने के लिए समन्वित तरीके से अभियान चलाएंगे।

इस मुलाकात के जरिए महागठबंधन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि आंतरिक मतभेदों की चर्चाओं के बावजूद उसके प्रमुख सहयोगी दल चुनावी चुनौती का सामना एकजुट होकर करने के लिए तैयार हैं।