चाईबासा ऑपरेशन से टूटी नक्सलियों की कमर, 17 माओवादी ढेर

चाईबासा ऑपरेशन से टूटी नक्सलियों की कमर, 17 माओवादी ढेर

चाईबासा ऑपरेशन से टूटी नक्सलियों की कमर, 17 माओवादी ढेर
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jan 24, 2026, 4:27:00 PM

झारखंड पुलिस के महानिदेशक तदाशा मिश्रा ने दावा किया है कि चाईबासा क्षेत्र में हाल ही में चलाया गया संयुक्त सुरक्षा अभियान नक्सलवाद के अंत की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हुआ है। उनके अनुसार लगातार दबाव और सटीक कार्रवाई के चलते माओवादी संगठन की संरचना बिखर चुकी है और अब बचे हुए उग्रवादियों के पास आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

डीजीपी ने बताया कि 22 और 23 जनवरी को सारंडा और कोल्हान के अति संवेदनशील इलाकों में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के 17 सदस्यों को मार गिराया गया। इस मुठभेड़ में संगठन के कुख्यात शीर्ष नेता अनल उर्फ पतिराम मांझी और अनमोल उर्फ सुशांत भी मारे गए। दोनों पर झारखंड और ओडिशा में मिलाकर करोड़ों रुपये का इनाम घोषित था।

खुफिया सूचना से शुरू हुई कार्रवाई

पुलिस सूत्रों के अनुसार चाईबासा के पुलिस अधीक्षक अमित रेणु को पुख्ता जानकारी मिली थी कि अनल और अनमोल अपने हथियारबंद दस्ते के साथ छोटानागरा थाना क्षेत्र के कुमडीह और बहदा गांव के आसपास के दुर्गम जंगल-पहाड़ी इलाके में छिपे हुए हैं। इस इनपुट के बाद झारखंड पुलिस, कोबरा की 209वीं बटालियन, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीम ने इलाके को चारों ओर से घेरकर ऑपरेशन लॉन्च किया।

दो दिनों तक चली मुठभेड़

अभियान के दौरान सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच कई चरणों में तीव्र गोलीबारी हुई। नक्सलियों की ओर से भारी फायरिंग की गई, जिसका जवानों ने रणनीतिक और नियंत्रित जवाब दिया। संघर्ष के बाद नक्सली जंगलों की ओर भागे, लेकिन बाद में चलाए गए व्यापक तलाशी अभियान में अब तक 17 शव बरामद किए गए हैं।

इनामी कमांडर भी ढेर

मारे गए नक्सलियों में अनल उर्फ पतिराम मांझी पर झारखंड में एक करोड़ रुपये, ओडिशा में एक करोड़ 20 लाख रुपये और एनआईए की ओर से 15 लाख रुपये का इनाम था। वहीं अनमोल उर्फ सुशांत पर झारखंड में 25 लाख और ओडिशा में 65 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनके अलावा अमित मुंडा, पिंटू लोहरा, लालजीत उर्फ लालू, समीर सोरेन, रापा उर्फ पावेल, राजेश मुंडा, बुलबुल अलदा, बबिता, पूर्णिमा, सुरजमुनी, जोंगा, सोमबारी पूर्ति, सोमा होनहागा, मुक्ति होनहागा और सरिता भी मारे गए। इन सभी पर गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित होने के आरोप थे।

हथियार और गोला-बारूद बरामद

सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों के ठिकानों से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री भी जब्त की गई है। बरामद सामान में चार एके राइफल, एक एकेएम, चार इंसास राइफल, तीन एसएलआर, तीन 303 राइफल, बड़ी संख्या में कारतूस और रोजमर्रा के उपयोग का सामान शामिल है।

तीन साल में बदली तस्वीर

डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में चाईबासा और आसपास के इलाकों में नक्सल विरोधी रणनीति को लगातार धार दी गई है। इस अवधि में 183 नक्सलियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि इससे पहले अलग-अलग मुठभेड़ों में 11 उग्रवादी मारे जा चुके थे। ताजा अभियान में 17 नक्सलियों के मारे जाने से संगठन को भारी क्षति पहुंची है।

सुरक्षा कैंपों से बढ़ा लोगों का भरोसा

उन्होंने यह भी बताया कि उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिससे नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है और ग्रामीण इलाकों में आम लोगों का भरोसा सुरक्षा बलों पर मजबूत हुआ है। डीजीपी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो नक्सली अब भी हथियार के रास्ते पर हैं, उन्हें आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहिए, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।