छठे वेतनमान विवाद में BSFC को झटका, कानूनी प्रक्रिया में चूक पड़ी भारी

छठे वेतनमान विवाद में BSFC को झटका, कानूनी प्रक्रिया में चूक पड़ी भारी

छठे वेतनमान विवाद में BSFC को झटका, कानूनी प्रक्रिया में चूक पड़ी भारी
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 03, 2026, 2:26:00 PM

झारखंड हाईकोर्ट ने बिहार स्टेट फाइनेंशियल कॉरपोरेशन (BSFC) की अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि रिव्यू याचिका के खारिज होने के बाद उसके खिलाफ अलग से अपील दायर करना विधिसम्मत नहीं है। अदालत के इस फैसले ने कॉरपोरेशन की कानूनी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि रिव्यू याचिका पर दिया गया आदेश कोई स्वतंत्र या नया निर्णय नहीं होता। ऐसे में इसे चुनौती देने के लिए अलग से अपील का रास्ता नहीं अपनाया जा सकता। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी पक्ष को आपत्ति है, तो उसे मूल आदेश के खिलाफ ही अपील करनी चाहिए।

इस मामले की सुनवाई 17 मार्च को पूरी हो चुकी थी, जिसके बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। अब अंतिम आदेश जारी करते हुए कोर्ट ने BSFC की अपील को अमान्य मानते हुए खारिज कर दिया।

पूरा विवाद कॉरपोरेशन के कर्मचारियों से जुड़ा है, जिन्होंने छठे वेतन आयोग के लाभ की मांग को लेकर न्यायालय का रुख किया था। इस पर एकल पीठ ने कहा था कि यदि संस्थान की वित्तीय स्थिति इसकी अनुमति देती है, तो उपलब्ध संसाधनों के आधार पर कर्मचारियों को यह लाभ दिया जा सकता है।

गौरतलब है कि BSFC के बोर्ड ने 28 जून 2019 को छठे वेतनमान लागू करने का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन बाद में 15 मई 2023 को इसे वापस ले लिया गया। कॉरपोरेशन का तर्क था कि उसकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ को वहन कर सके।

एकल पीठ के आदेश के बाद BSFC ने पहले रिव्यू याचिका दाखिल की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद कॉरपोरेशन ने उसी रिव्यू आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की, जिसे हाईकोर्ट ने कानून के दायरे से बाहर बताते हुए खारिज कर दिया।

अदालत के इस फैसले के बाद अब BSFC के पास यही विकल्प बचता है कि वह मूल आदेश के खिलाफ ही नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई करे। यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के पालन की अनिवार्यता को भी रेखांकित करता है।