झारखंड हाईकोर्ट से जुड़े अधिवक्ता महेश तिवारी को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई सामने आई है। महिला अधिवक्ता के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट के पुराने मामले में अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद उनका वकालत करने का अधिकार फिलहाल निलंबित कर दिया गया है।
यह प्रकरण वर्ष 2012 का है, जब हाईकोर्ट परिसर में ही महेश तिवारी पर अधिवक्ता ऋतु कुमार के साथ अभद्र व्यवहार करने, शारीरिक हमला करने और धमकी देने के आरोप लगे थे। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद निचली अदालत ने उन्हें दोषी माना और दो वर्ष की सजा सुनाई।
अदालत के इस निर्णय के बाद बार काउंसिल के नियम स्वतः लागू हो गए। प्रावधानों के अनुसार, किसी भी अधिवक्ता को यदि आपराधिक मामले में सजा मिलती है, तो उसके पेशेवर अधिकारों पर असर पड़ता है। इसी के तहत राज्य बार काउंसिल ने संज्ञान लेते हुए महेश तिवारी का लाइसेंस निलंबित कर दिया है।
इस निर्णय के चलते निलंबन अवधि के दौरान वे देश की किसी भी अदालत में वकालत नहीं कर सकेंगे। यह कार्रवाई कानूनी पेशे में आचार संहिता और अनुशासन को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।