महिला आरक्षण पर भाजपा का दोहरा चरित्र उजागर, 33% की बात पूरी तरह से बेईमानी : आलोक दूबे

महिला आरक्षण पर भाजपा का दोहरा चरित्र उजागर, 33% की बात पूरी तरह से बेईमानी : आलोक दूबे

महिला आरक्षण पर भाजपा का दोहरा चरित्र उजागर, 33% की बात पूरी तरह से बेईमानी : आलोक दूबे
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 27, 2026, 3:43:00 PM

देश में महिला राजनीतिक भागीदारी को लेकर सियासी बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए दावा किया कि महिलाओं को राजनीति में आगे लाने की वास्तविक पहल कांग्रेस ने की, जबकि भाजपा इस मुद्दे पर केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।

दूबे ने ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि भारत को पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कांग्रेस के नेतृत्व में मिलीं, जिन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका को नई दिशा दी। इसी क्रम में उन्होंने प्रतिभा पाटिल का उल्लेख किया, जो कांग्रेस के समर्थन से देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं। उनके मुताबिक, ये घटनाएं बताती हैं कि महिलाओं के नेतृत्व को आगे बढ़ाने में कांग्रेस की भूमिका अहम रही है।

स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए दूबे ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना कांग्रेस सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम था। उनका कहना है कि इस फैसले के चलते आज देशभर में लाखों महिलाएं पंचायतों और शहरी निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में काम कर रही हैं।

महिला आरक्षण कानून को लेकर चल रही बहस के बीच दूबे ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया जा रहा है, तो केंद्र सरकार को 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को बिना देरी लागू कर देना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसा होने पर राजनीतिक विवाद अपने आप समाप्त हो जाएगा।

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा का उद्देश्य महिलाओं को वास्तविक अधिकार देना नहीं, बल्कि चुनावी लाभ हासिल करना है। उन्होंने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की कम हिस्सेदारी की ओर इशारा करते हुए कहा कि जहां देश की लगभग आधी आबादी महिलाएं हैं, वहीं उनकी राजनीतिक उपस्थिति अभी भी सीमित है। ऐसे में कानून पारित होने के बावजूद उसका क्रियान्वयन न होना कई सवाल खड़े करता है।

दूबे ने भाजपा पर गंभीर आरोपों का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रदेश के महोबा जिले की एक घटना का जिक्र किया, जिसमें पार्टी के एक पदाधिकारी पर महिला कार्यकर्ता ने शोषण के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं महिला सशक्तिकरण के दावों को कमजोर करती हैं।

इतिहास का हवाला देते हुए दूबे ने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा का रुख पहले भी स्पष्ट नहीं रहा है। उन्होंने 2010 में राज्यसभा में पारित महिला आरक्षण विधेयक का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि उस समय व्यापक समर्थन मिला होता, तो यह कानून बहुत पहले लागू हो सकता था।

चुनावी रणनीति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में महिला मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए इस मुद्दे को प्रमुखता दी गई, लेकिन अब इसे लेकर विपक्ष पर ही आरोप लगाए जा रहे हैं।

अंत में दूबे ने केंद्र सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि भाजपा वास्तव में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर गंभीर है, तो उसे महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू करना चाहिए। उनके अनुसार, इससे न केवल महिलाओं को उनका अधिकार मिलेगा, बल्कि इस मुद्दे पर जारी राजनीतिक विवाद भी खत्म हो जाएगा।