झारखंड में नगर निकाय चुनाव भले ही दलीय आधार पर नहीं हो रहे हों, लेकिन राजनीतिक दलों की सक्रियता पूरी तरह नजर आ रही है। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी अनुशासन तोड़ने वाले नेताओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी ने उन नेताओं को कारण बताओ नोटिस भेजा है जो भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर गए हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यदि तय समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो संबंधित नेताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
धनबाद में मेयर चुनाव को लेकर बढ़ा विवाद
धनबाद नगर निगम के मेयर पद के लिए भाजपा ने संजीव कुमार को अपना समर्थित प्रत्याशी घोषित किया है। इसके बावजूद पार्टी के ही कुछ नेता उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह, भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश पांडेय और भाजपा नेता भृगुनाथ भगत शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि पार्टी ने इन तीनों को चुनाव से हटाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए। यहां तक कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने भी बातचीत कर उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद पार्टी ने तीनों नेताओं को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
प्रदेशभर में 18 नेता पार्टी की कार्रवाई के दायरे में
भाजपा ने राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 18 ऐसे नेताओं को नोटिस भेजा है जो पार्टी समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। प्रदेश महामंत्री प्रदीप वर्मा की ओर से धनबाद के संजीव सिंह, मुकेश पांडेय और भृगुनाथ भगत को पत्र जारी किया गया है।
संजीव सिंह का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वे झरिया की भाजपा विधायक रागिनी सिंह के पति हैं। वहीं देवघर में बाबा बलिया और पलामू में परशुराम ओझा से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि इसे पार्टी विरोधी गतिविधि और अनुशासनहीनता माना जा रहा है। सभी संबंधित नेताओं को सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।
पार्टी संगठन ने जिला स्तर पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है। गिरिडीह, जमशेदपुर, चाईबासा समेत कई जिलों में जिला कमेटियों ने 20 से अधिक नेताओं को पत्र भेजकर उनकी गतिविधियों पर जवाब मांगा है। भाजपा ने संकेत दिए हैं कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो पार्टी आगे कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है।