संभावित सूखे से निपटने की तैयारी तेज़, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में खरीफ रणनीति पर मंथन

संभावित सूखे से निपटने की तैयारी तेज़, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में खरीफ रणनीति पर मंथन

संभावित सूखे से निपटने की तैयारी तेज़, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में खरीफ रणनीति पर मंथन
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: May 11, 2026, 6:33:00 PM

रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में सोमवार से दो दिवसीय खरीफ कार्यशाला की शुरुआत हुई, जिसमें राज्य के सभी जिलों से पहुंचे कृषि अधिकारियों ने आगामी मानसून और संभावित सूखे की परिस्थितियों को लेकर अपनी-अपनी तैयारियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में आकस्मिक योजनाओं को मजबूत करना और किसानों को प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अधिकतम राहत उपलब्ध कराने की रणनीति तैयार करना रहा।

बैठक में विभिन्न जिलों के कृषि पदाधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि यदि इस वर्ष वर्षा सामान्य से कम रहती है या सूखे जैसी स्थिति बनती है, तो उससे निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर कौन-कौन से कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बीज प्रबंधन, वैकल्पिक खेती और जल संरक्षण जैसे मुद्दों पर अपनी योजनाएं साझा कीं।

विश्वविद्यालय के कुलपति एससी दुबे ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जुलाई के अंतिम सप्ताह तक सभी जिलों को अपनी आपदा-प्रबंधन तैयारियां पूरी कर लेनी चाहिए। उन्होंने किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीज समय पर पहुंचाने पर विशेष जोर दिया। साथ ही नर्सरी प्रबंधन, मिश्रित खेती और कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने की सलाह दी।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सूखे के संकेत मिलते हैं तो उर्वरकों, विशेषकर यूरिया के उपयोग में सावधानी बरती जानी चाहिए। इसके अलावा मिट्टी संरक्षण, वर्षा जल संचयन और बागवानी को खेती के साथ जोड़ने की आवश्यकता बताई गई। कुलपति ने किसानों को केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर न रहने और पशुपालन जैसे अतिरिक्त आय स्रोत अपनाने के लिए प्रेरित करने की भी बात कही।

कार्यशाला में उपनिदेशक (सांख्यिकी) शैलेन्द्र कुमार ने जानकारी दी कि कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के निर्देश पर विभाग ने सभी जिलों को संभावित सूखे को ध्यान में रखते हुए व्यापक तैयारी करने को कहा है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग के विभिन्न प्रभागों के बीच समन्वय स्थापित कर ऐसी योजनाएं बनाई जा रही हैं, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में किसानों को तुरंत सहायता दी जा सके।

पहले दिन आकस्मिक कृषि योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं, जबकि दूसरे दिन तकनीकी सत्र और आगे की रणनीतियों पर चर्चा होगी। रांची के जिला कृषि पदाधिकारी राम शंकर प्रसाद सिंह ने जिले की तैयारियों और वैकल्पिक खेती मॉडल की जानकारी दी। वहीं खूंटी के जिला कृषि पदाधिकारी हरिकेश ने भी सूखे से निपटने के लिए तैयार की गई योजनाओं का विवरण साझा किया।

कार्यक्रम में कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न जिलों से आए कृषि पदाधिकारी, वैज्ञानिक और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ मौजूद रहे। कार्यशाला के दौरान किसानों की आय बढ़ाने और मौसम संबंधी चुनौतियों के बीच कृषि को टिकाऊ बनाने पर विशेष जोर दिया गया।