'बच्चों को पढ़ाएं या चुनाव कराएं?' SIR ड्यूटी पर शिक्षक संघ का सरकार से सवाल

'बच्चों को पढ़ाएं या चुनाव कराएं?' SIR ड्यूटी पर शिक्षक संघ का सरकार से सवाल

'बच्चों को पढ़ाएं या चुनाव कराएं?' SIR ड्यूटी पर शिक्षक संघ का सरकार से सवाल
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jun 29, 2026, 3:33:00 PM

झारखंड में 30 जून से शुरू होने वाले विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-एसआईआर) अभियान को लेकर शिक्षक संगठनों ने सरकार की व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि अभियान के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों को बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के रूप में तैनात किए जाने से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होगी और इसका असर विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति पर पड़ेगा।

एसआईआर अभियान के तहत राज्यभर में घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए पर्याप्त संख्या में बीएलओ की आवश्यकता है, जिसके चलते शिक्षकों की भी प्रतिनियुक्ति की जा रही है। हालांकि, झारखंड माध्यमिक शिक्षक संघ ने इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा है कि शिक्षकों को बार-बार गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां सौंपना शिक्षा व्यवस्था के हित में नहीं है।

संघ के प्रदेश महासचिव गंगा प्रसाद यादव का कहना है कि सरकारी विद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में चुनाव, जनगणना, मतदाता सूची पुनरीक्षण और अन्य प्रशासनिक कार्यों में शिक्षकों की तैनाती से नियमित कक्षाओं का संचालन प्रभावित होता है। विशेष रूप से माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों, खासकर दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी पर इसका सीधा असर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा परिणाम कमजोर आने पर जवाबदेही शिक्षकों से तय की जाती है, जबकि उनके कार्य का बड़ा हिस्सा गैर-शैक्षणिक गतिविधियों में खर्च हो जाता है।

जिला सचिव संजय यादव ने भी इसी चिंता को दोहराते हुए कहा कि जनगणना से संबंधित कार्य पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं और अब शिक्षकों को मतदाता पुनरीक्षण अभियान में भी लगाया जा रहा है। इससे विद्यालयों में नियमित शिक्षण कार्य बाधित होने की आशंका है।

शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि एसआईआर अभियान में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति पर दोबारा विचार किया जाए, ताकि विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित न हो और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

दूसरी ओर, चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है और इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन आवश्यक है। राज्य में करीब 24,520 मतदान केंद्र हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार लगभग 50 हजार बीएलओ की व्यवस्था में पहले से करीब 7,500 शिक्षक जुड़े हुए हैं, जबकि अभियान को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए 25 हजार से अधिक शिक्षकों की अतिरिक्त सेवाएं भी ली जा सकती हैं।

अधिकारियों का यह भी कहना है कि जिन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या कम है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था कर पठन-पाठन पर न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

राज्य में शिक्षक उपलब्धता की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार झारखंड में औसतन 36 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक उपलब्ध है, जबकि राष्ट्रीय औसत 24 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक का है। शिक्षक संगठनों का तर्क है कि ऐसी स्थिति में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने से शिक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 30 जून से घर-घर मतदाता सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद 1 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। 4 अगस्त से 1 सितंबर तक दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी तथा उनके निपटारे के बाद 7 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।