झारखंड में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दुबे ने इसे निराधार आरोपों और राजनीतिक कुंठा से प्रेरित करार दिया है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं का पूरा कार्यकाल सत्ता के दुरुपयोग, खनन माफियाओं को संरक्षण और प्रशासनिक अव्यवस्था से जुड़ा रहा हो, उन्हें आज संविधान और कानून की दुहाई देना शोभा नहीं देता।
आलोक दुबे ने दावा किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार संवैधानिक प्रक्रियाओं और न्यायपालिका के प्रति पूरी निष्ठा के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रही है, क्योंकि अब झारखंड में न तो प्रशासन को खरीदा जा सकता है और न ही माफिया तत्वों को पहले जैसी छूट मिल रही है।
उनके मुताबिक, इसी बेचैनी के कारण बाबूलाल मरांडी सुप्रीम कोर्ट और संवैधानिक संस्थाओं का नाम लेकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि बाबूलाल मरांडी को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने शासनकाल का लेखा-जोखा देना चाहिए, जब राज्य अवैध खनन, जमीन कब्जाने और भ्रष्टाचार की घटनाओं को लेकर चर्चा में रहता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा शासन में पुलिस और जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक हितों के लिए किया गया।
“झारखंड अब डर-धमकी से नहीं चलेगा”
आलोक दुबे ने दोहराया कि राज्य की जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से सरकार चुनी है और सरकार कानून के दायरे में रहकर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका सवाल उठाने की होती है, लेकिन झूठ फैलाकर संस्थाओं की छवि खराब करना लोकतंत्र के खिलाफ है और यह केवल हताशा की राजनीति को दर्शाता है।
कांग्रेस महासचिव ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी और झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी राज्य की जनता, संविधान और न्यायपालिका के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि चाहे भाजपा कितना भी शोर मचाए, सच्चाई यही है कि कानून सभी के लिए समान है और आगे भी रहेगा।