झारखंड में अदालतों में बढ़ते लंबित मामलों को कम करने के लिए सरकार और न्यायिक संस्थाएं मिलकर एक नई रणनीति पर काम कर रही हैं। इसी कड़ी में ‘मेडिएशन फॉर द नेशन-2.0’ अभियान को राज्य में सक्रिय रूप से लागू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA) और राज्य के विधि विभाग ने सभी सरकारी विभागों को इस पहल में भागीदारी निभाने के निर्देश दिए हैं, ताकि ऐसे विवाद जिन्हें बातचीत और सहमति से सुलझाया जा सकता है, उन्हें अदालतों में लंबी सुनवाई से पहले ही मध्यस्थता के माध्यम से निपटाया जा सके।
इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए JHALSA ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के साथ समन्वय मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्राधिकरण की सदस्य सचिव-सह-समन्वयक कुमारी रंजना अस्थाना ने इस संबंध में विधि (न्याय) विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि यदि सभी विभाग सक्रिय सहयोग दें, तो बड़ी संख्या में मामलों का समाधान मध्यस्थता के जरिए संभव हो सकता है।
दरअसल, इस दिशा में पहल झारखंड हाईकोर्ट के तहत गठित स्टेट लेवल मेडिएशन मॉनिटरिंग कमेटी की 4 फरवरी 2026 को हुई बैठक के बाद तेज हुई। बैठक में यह तय किया गया कि सरकारी विभागों से जुड़े लंबित मामलों की पहचान कर उन्हें मध्यस्थता प्रक्रिया में लाया जाए। इससे एक ओर लोगों को जल्द न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी, वहीं अदालतों में मामलों का बोझ भी घटेगा।
JHALSA ने यह भी सुझाव दिया है कि अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी विभागों के प्रधान सचिवों और विभागाध्यक्षों की एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाए। प्रस्ताव है कि यह बैठक राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हो, ताकि अधिकारियों को इस अभियान के उद्देश्य, प्रक्रिया और उनकी भूमिका के बारे में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जा सकें।
सरकार ने अभियान के क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक विभाग में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा है। ये अधिकारी अपने-अपने विभागों में लंबित मामलों की समीक्षा करेंगे और यह तय करेंगे कि किन मामलों का समाधान मध्यस्थता से संभव है। इसके बाद ऐसे मामलों की सूची तैयार कर JHALSA को भेजी जाएगी, ताकि उन्हें मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल किया जा सके।
इस विषय पर 24 फरवरी 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में भी चर्चा की गई थी। उस दौरान सभी विभागों को निर्देश दिया गया था कि वे अपने-अपने लंबित मामलों की सूची तैयार करें और ऐसे मामलों की पहचान करें जिन्हें आपसी सहमति और बातचीत से सुलझाया जा सकता है। सरकार ने इस प्रक्रिया को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है।
सरकार ने विभागों से कहा है कि मध्यस्थता योग्य मामलों की सूची सीधे JHALSA के सदस्य सचिव को भेजी जाए। यह सूची रांची के डोरंडा स्थित JHALSA कार्यालय (एजी ऑफिस के पास) में जमा कराई जा सकती है या ई-मेल के माध्यम से भी भेजी जा सकती है। इससे मामलों को जल्दी मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल करने में सुविधा होगी।
‘मेडिएशन फॉर द नेशन-2.0’ सुप्रीम कोर्ट की Mediation and Conciliation Project Committee (MCPC) के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा राष्ट्रीय अभियान है। इसका उद्देश्य अदालतों में लंबित मामलों को आपसी सहमति और संवाद के जरिए सुलझाना है, ताकि न्याय प्रक्रिया को तेज किया जा सके और लोगों को कम समय में समाधान मिल सके। इस पहल से न्यायालयों पर बढ़ते मामलों के दबाव को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।