अदाणी समूह ने बिजली क्षेत्र में एक नई पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य देश में पावर ट्रांसमिशन के लिए जरूरी कुशल श्रमिकों की कमी को दूर करना है। अब तक अदाणी एनर्जी सॉल्यूशन लिमिटेड जहां बिजली पहुंचाने के नेटवर्क को मजबूत करने में जुटी थी, वहीं अब कंपनी फील्ड में काम करने वाले तकनीकी मैनपावर को तैयार करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है।
इस प्रशिक्षण अभियान को ‘लाइट इंडिया प्रोजेक्ट’ नाम दिया गया है। इसकी शुरुआत झारखंड के गोड्डा में, अदाणी पावर प्रोजेक्ट के नजदीक की गई है।
देशभर में बिजली वितरण और ट्रांसमिशन विस्तार के लिए हाई टेंशन लाइनों वाले टावरों का निर्माण बेहद अहम काम माना जाता है। लेकिन इस क्षेत्र में काम करने के लिए जिस तरह की तकनीकी दक्षता और ऊंचाई पर काम करने का अनुभव चाहिए, वह फिलहाल सीमित लोगों के पास ही उपलब्ध है।
टावर लगाने की प्रक्रिया सामान्य निर्माण कार्यों से अलग होती है, क्योंकि इसमें 40 से 70 मीटर तक ऊंचाई पर काम करना पड़ता है और कई बार इससे भी अधिक ऊंचाई पर कार्य करना होता है।
टावर निर्माण का काम आमतौर पर विशेष टीमों के जरिए किया जाता है, जिन्हें ‘गैंग’ कहा जाता है। एक गैंग में लगभग 30 से 35 सदस्य होते हैं।
देशभर में इस समय इस सेक्टर में कुल मिलाकर करीब 18,000 से 20,000 लोग काम कर रहे हैं, जो लगभग 600 से 650 गैंग के रूप में विभिन्न परियोजनाओं में सक्रिय हैं। ये टीमें एक स्थान पर काम पूरा होने के बाद दूसरे प्रोजेक्ट में चली जाती हैं।
टावर निर्माण की परियोजनाएं खेतों, जंगलों, नदी-नालों, राजमार्गों और कृषि भूमि जैसे कई तरह के इलाकों से गुजरती हैं। काम आगे बढ़ने के साथ-साथ गैंग के सदस्य भी उसी हिसाब से स्थान बदलते रहते हैं।
बीते कुछ वर्षों में पावर ट्रांसमिशन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट तेजी से बढ़े हैं। इसके कारण इस काम के लिए उपलब्ध मैनपावर जरूरत से काफी कम पड़ रही है।
स्थिति यह है कि जितने लोग अभी इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं, आवश्यकता उसके मुकाबले लगभग दोगुनी बताई जा रही है। इसी कमी के चलते कई प्रोजेक्ट समयसीमा से पीछे भी चल रहे हैं। टावर निर्माण गैंग में शामिल करीब 90% से अधिक श्रमिक मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड से आते हैं।
अब तक यह काम सीखने की प्रक्रिया पारंपरिक रही है, जिसमें नए लोग वरिष्ठों के साथ काम करते हुए अनुभव से प्रशिक्षण हासिल करते हैं। इसी वजह से कई बार एक ही गांव या जिले के लोग एक ही गैंग में शामिल होते हैं और परिवार के कई सदस्य साथ काम करते देखे जाते हैं।
अदाणी की इस नई पहल के तहत प्रतिभागियों को तीन महीने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस दौरान रहने, खाने और ट्रेनिंग का पूरा खर्च कंपनी वहन करती है।
इसके अलावा प्रशिक्षण अवधि में प्रतिभागियों को 21,000 रुपये प्रति माह वजीफा भी दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान टावर निर्माण की तकनीकी बारीकियां सिखाई जाती हैं, जैसे पूरे टावर को असेंबल और डिसअसेंबल करना।
कंपनी के अनुसार, प्रशिक्षण पूरा करने के बाद श्रमिकों को उद्योग में रोजगार मिलने की संभावना बढ़ जाती है और वे आसानी से 30,000 से 35,000 रुपये प्रति माह तक की आमदनी कर सकते हैं।
पहले बैच में शामिल 70 प्रतिभागी अपना प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं और अब वे उद्योग में काम कर रहे हैं। अदाणी समूह के पास फिलहाल इस परियोजना के तहत प्रति वर्ष 1,000 लोगों को ट्रेनिंग देने की क्षमता है। कंपनी का लक्ष्य देशभर में ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स के लिए प्रशिक्षित वर्कफोर्स तैयार करना और बढ़ती जरूरतों को पूरा करना है।
इस पहल को बिजली क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण को गति देने वाली महत्वपूर्ण योजना के रूप में देखा जा रहा है।