रिम्स जमीन घोटाले को लेकर पूर्व अंचल अधिकारियों से एसीबी की पूछताछ, कई कर्मचारी और दलाल भी रडार पर

रिम्स जमीन घोटाले को लेकर पूर्व अंचल अधिकारियों से एसीबी की पूछताछ, कई कर्मचारी और दलाल भी रडार पर

रिम्स जमीन घोटाले को लेकर पूर्व अंचल अधिकारियों से एसीबी की पूछताछ, कई कर्मचारी और दलाल भी रडार पर
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 10, 2026, 1:20:00 PM

रांची स्थित रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) की सरकारी जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त और कब्जे से जुड़े मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जांच प्रक्रिया को और तेज कर दिया है। जांच के क्रम में कई पूर्व अंचल अधिकारियों समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों को एसीबी मुख्यालय बुलाया गया, जहां उन्होंने मामले की जांच कर रहे डीएसपी स्तर के अधिकारी के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया।

सूत्रों के अनुसार इस मामले में केवल पूर्व अंचल अधिकारी (सीओ) और अंचल निरीक्षक (सीआई) ही नहीं, बल्कि भूमि से जुड़े कई अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। एसीबी ने रांची के भूमि सुधार उपसमाहर्ता (एलआरडीसी) कार्यालय के कुछ कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है। इन कर्मचारियों पर संदेह है कि उन्होंने संदिग्ध भूमि संबंधी फाइलों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।

जांच एजेंसी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अधिकारियों के अलावा स्थानीय स्तर पर जमीन मापने वाले अमीन, राजस्व कर्मी और रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान गवाह बनने वाले जमीन दलालों को भी जांच में शामिल किया गया है। एसीबी को आशंका है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन की खरीद-फरोख्त को वैध दिखाने में इन बिचौलियों की अहम भूमिका रही होगी।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि रिम्स की संबंधित जमीन का अधिग्रहण बहुत पहले ही किया जा चुका था और उससे जुड़े सभी रिकॉर्ड सरकारी अभिलेखों में दर्ज थे। इसके बावजूद वर्ष 1993 के बाद से इस जमीन पर अवैध कब्जे और रजिस्ट्री का सिलसिला शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि वर्षों तक यह खेल बड़े पैमाने पर चलता रहा, जिससे सरकारी संपत्ति पर निजी स्वामित्व स्थापित करने की कोशिश की गई।

एसीबी अब इस पूरे प्रकरण में शामिल सभी स्तरों के लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि सरकारी रिकॉर्ड होने के बावजूद जमीन की अवैध रजिस्ट्री और कब्जा कैसे संभव हुआ और इसमें किन-किन अधिकारियों, कर्मचारियों और बिचौलियों की मिलीभगत रही।