एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा की जा रही जांच में जेल में बंद निलंबित IAS अधिकारी विनय चौबे से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। शुरुआत भले ही आय से अधिक संपत्ति के मामले से हुई हो, लेकिन अब यह जांच एक संगठित और बहु-शहरों में फैले मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की तस्वीर पेश कर रही है, जिसके केंद्र में खुद चौबे होने की आशंका जताई जा रही है।
जांच एजेंसी के अनुसार, भ्रष्टाचार से अर्जित धन को एक ही स्थान पर रखने के बजाय, उसे अलग-अलग शहरों और राज्यों में अचल संपत्तियों के रूप में निवेश किया गया। गुरुग्राम में तीन महंगी संपत्तियों का खुलासा होने के बाद अब ACB का फोकस रांची पर आ गया है, जहां पॉश इलाकों में छिपी संपत्तियों को चिन्हित किया गया है।
ACB की ताजा जांच में रांची में दो प्रमुख संपत्तियों का पता चला है। इनमें हरि ओम टावर के पास स्थित एक कीमती भूखंड और वर्धमान कंपाउंड में मौजूद एक लग्जरी 3BHK फ्लैट शामिल है। एजेंसी का दावा है कि इन दोनों संपत्तियों की बाजार कीमत करोड़ों रुपये में है और इन्हें अपराध से अर्जित धन, यानी प्रोसीड ऑफ क्राइम, के तौर पर देखा जा रहा है।
जांच में सामने आया है कि इन संपत्तियों को सीधे विनय चौबे के नाम पर न रखकर उनके साले शिपिज त्रिवेदी के नाम दर्ज कराया गया था। आरोप है कि असली नियंत्रण अपने पास बनाए रखने के लिए ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ का इस्तेमाल किया गया, जिसे जांच एजेंसियां मनी लॉन्ड्रिंग का पारंपरिक और सुनियोजित तरीका मान रही हैं। इस पूरे लेन-देन को बेनामी प्रकृति का बताया जा रहा है, जहां नाम किसी और का है, लेकिन स्वामित्व और संचालन कथित तौर पर चौबे के हाथ में रहा।
ACB के सूत्रों के मुताबिक, यह मामला केवल एक अधिकारी के निजी भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रिश्तेदारों और करीबी लोगों को माध्यम बनाकर कई शहरों में संपत्तियों का जाल खड़ा किया गया। अब एजेंसी बैंक खातों, धन के प्रवाह, रजिस्ट्री दस्तावेजों और अन्य वित्तीय साक्ष्यों के जरिए इस कथित नेटवर्क की पूरी मनी ट्रेल खंगालने में जुटी है, ताकि इस पूरे सिस्टम के पीछे के कथित मास्टरमाइंड को कानून के शिकंजे में लाया जा सके।