कोयला और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर ईडी का बड़ा एक्शन प्लान, आर्थिक अपराधों पर कसेगा शिकंजा

कोयला और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर ईडी का बड़ा एक्शन प्लान, आर्थिक अपराधों पर कसेगा शिकंजा

कोयला और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर ईडी का बड़ा एक्शन प्लान, आर्थिक अपराधों पर कसेगा शिकंजा
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: May 08, 2026, 1:24:00 PM

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्वी भारत में आर्थिक अपराधों की जांच को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एक अहम प्रशासनिक बदलाव किया है। एजेंसी ने रांची और कोलकाता जोन की निगरानी को एकीकृत करते हुए रांची के संयुक्त निदेशक प्रभाकर प्रभात को पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी भी सौंप दी है। इस कदम को दोनों राज्यों में फैले मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और संगठित आर्थिक अपराधों के खिलाफ व्यापक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

प्रभाकर प्रभात हाल ही में मार्च 2026 में रायपुर से रांची स्थानांतरित होकर आए थे। रांची में पदभार संभालने के कुछ ही समय बाद उन्हें कोलकाता जोन का अतिरिक्त दायित्व दिए जाने से यह संकेत मिला है कि ईडी अब पूर्वी राज्यों से जुड़े मामलों की निगरानी केंद्रीकृत तरीके से करना चाहती है। इससे संवेदनशील मामलों की समीक्षा और कार्रवाई की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, झारखंड में चल रहे कई जांच मामलों में वित्तीय लेनदेन और संदिग्ध कंपनियों के तार पश्चिम बंगाल, विशेषकर कोलकाता, तक जुड़े पाए गए हैं। कोयला कारोबार, भूमि घोटाले और अवैध खनन से जुड़े मामलों में कथित रूप से शेल कंपनियों के इस्तेमाल के जरिए धन के प्रवाह को छिपाने की कोशिश की जाती रही है। अलग-अलग जोन के कारण अब तक सूचनाओं के समन्वय और संयुक्त कार्रवाई में समय लगता था, लेकिन नई व्यवस्था से एजेंसी को त्वरित कार्रवाई में सुविधा मिलेगी।

ईडी के भीतर इस बदलाव को क्रॉस-स्टेट आर्थिक नेटवर्क पर नकेल कसने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच सक्रिय सिंडिकेट लंबे समय से अवैध धन के लेनदेन और फर्जी कंपनियों के जरिए आर्थिक गतिविधियों को संचालित करते रहे हैं। अब दोनों राज्यों की जांच एक ही नेतृत्व के अधीन होने से मनी ट्रेल को जोड़ना, दस्तावेजों का मिलान करना और नेटवर्क की परतें खोलना ज्यादा आसान हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की प्रशासनिक एकजुटता से एजेंसियों के बीच तालमेल मजबूत होगा और बड़े आर्थिक अपराध मामलों में जांच की गति बढ़ेगी। ईडी की यह नई रणनीति आने वाले समय में पूर्वी भारत में चल रहे कई हाई-प्रोफाइल मामलों पर असर डाल सकती है।