षटतिला एकादशी पर आस्था का संगम, स्वर्णरेखा तट पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

षटतिला एकादशी पर आस्था का संगम, स्वर्णरेखा तट पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

षटतिला एकादशी पर आस्था का संगम, स्वर्णरेखा तट पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jan 14, 2026, 3:45:00 PM

बुधवार को जमशेदपुर में षटतिला एकादशी के अवसर पर धार्मिक आस्था का विशेष दृश्य देखने को मिला। सुबह से ही सोनारी दोमुहानी और मानगो क्षेत्र में स्वर्णरेखा नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी रही। कड़ाके की ठंड के बावजूद लोग पवित्र स्नान के लिए पहुंचे और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। स्नान के उपरांत तिल, अनाज, वस्त्र और धन का दान कर लोगों ने पुण्य लाभ अर्जित किया। घाटों पर लगातार बनी चहल-पहल से पूरा इलाका भक्ति और उल्लास के रंग में रंगा नजर आया।

हिंदू पंचांग के अनुसार षटतिला एकादशी का व्रत बुधवार, 14 जनवरी 2026 को रखा गया। धार्मिक मान्यताओं में इस व्रत को अत्यंत फलदायी बताया गया है। कहा जाता है कि षटतिला एकादशी का पालन करने से पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दिन तिल का विशेष महत्व माना गया है। तिल का दान, तिल से हवन, तिल मिश्रित भोजन तथा दैनिक जीवन में तिल का प्रयोग करने से दरिद्रता दूर होती है और देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह व्रत व्यक्ति के मन, वाणी और कर्म को शुद्ध करता है तथा उसे मोक्ष के पथ की ओर अग्रसर करता है। विशेष रूप से माघ माह में किए गए दान-पुण्य को दोगुना फलदायी माना गया है, इसी कारण इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला।

ज्योतिषाचार्य पं. संजय तिवारी ने बताया कि इस वर्ष षटतिला एकादशी का महत्व और बढ़ गया है, क्योंकि यह वर्ष की पहली एकादशी है और इसका मकर संक्रांति से विशेष संयोग बन रहा है। उनके अनुसार 14 जनवरी को दोपहर तीन बजे के बाद सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे एकादशी के पुण्य फल में कई गुना वृद्धि होगी। इसके साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे शुभ योग भी बन रहे हैं, जिन्हें व्रत, दान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।

उन्होंने कहा कि ऐसे दुर्लभ संयोग में किया गया स्नान और दान जीवन की अनेक बाधाओं को दूर करता है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। इसी आस्था के कारण जमशेदपुर के नदी घाटों पर तड़के से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।