अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र में बने युद्ध जैसे हालात के बीच दुबई और शारजाह में फंसे रांची के करीब 85 लोग आखिरकार सुरक्षित अपने घर लौट आए। गुरुवार को ये सभी चरणबद्ध तरीके से बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पहुंचे, जहां परिवार वालों की आंखों में खुशी और राहत साफ झलक रही थी।
दरअसल, रांची के इन व्यापारियों और डीलरों को एक सीमेंट कंपनी की ओर से टूर के तहत दुबई ले जाया गया था। सभी लोग 23 फरवरी को रांची से कोलकाता होते हुए दुबई पहुंचे थे। इसी दौरान क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बन गई और कई उड़ानें रद्द कर दी गईं, जिससे ये लोग पिछले कुछ दिनों से वहीं फंसे हुए थे।
गुरुवार को दोपहर में 25 व्यापारी पहले रांची पहुंचे, जबकि शाम करीब साढ़े पांच बजे 60 अन्य लोग भी एयरपोर्ट पर उतर गए। चार दिनों तक होटल में बंद रहने और लगातार बमबारी की आवाजें सुनने के बाद जब वे अपने शहर लौटे, तो उनके चेहरों पर सुकून साफ दिखाई दे रहा था। एयरपोर्ट पर परिजनों ने उन्हें गले लगाकर स्वागत किया।
कई परिवारों के लिए यह पल बेहद भावुक करने वाला था। किसी की पत्नी लंबे समय से इंतजार कर रही थी, तो कोई बेटा फूलों का गुलदस्ता लेकर पिता के आने की राह देख रहा था। सुरक्षित वापसी के बाद सभी ने भगवान का शुक्रिया अदा किया और परिवार के साथ राहत की सांस ली।
राजधानी के सीमेंट व्यापारी अजय कुमार की पत्नी पूजा कुमारी ने बताया कि पति के लौटने के बाद अब परिवार सुकून से होली मना पाएगा। उन्होंने कहा कि जब से वे दुबई में फंसे थे, पूरा परिवार चिंता में डूबा हुआ था और किसी का मन त्योहार मनाने का नहीं था। अब उनके सुरक्षित लौटने के बाद घर में पकवान बनेंगे और असली मायने में होली का उत्सव मनाया जाएगा। उनका बेटा दिव्यांश कुमार भी एयरपोर्ट पर घंटों से गुलदस्ता लेकर पिता का इंतजार करता रहा।
वहीं, थड़पखना निवासी व्यापारी राहुल वर्मा के भाई रोशन वर्मा ने बताया कि गुरुवार को ही राहुल के बेटे डुनडुन का जन्मदिन है। ऐसे खास दिन पर पिता का सुरक्षित घर लौटना उसके लिए सबसे बड़ा तोहफा बन गया। उन्होंने बताया कि जब बमबारी की खबरें सामने आईं, तो पूरा परिवार घबरा गया था। हालांकि राहुल ने फोन पर बताया था कि वे होटल में सुरक्षित हैं और उन्हें बाहर निकलने से मना किया गया है।
दुबई से लौटे व्यापारी विनय कुमार केसरी ने उस भयावह अनुभव को याद करते हुए बताया कि जब वे शाम चार बजे अबू धाबी एयरपोर्ट पहुंचे और टिकट लेने की प्रक्रिया चल रही थी, तभी अचानक बमबारी शुरू हो गई। इसके बाद सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं और यात्रियों को वापस होटल भेज दिया गया। चार दिन बाद उन्हें बस से शारजाह एयरपोर्ट ले जाया गया, जो अबू धाबी से करीब आधे घंटे की दूरी पर है। वहां कुछ समय के लिए सभी लाइटें बंद कर दी गईं और करीब एक घंटे तक यात्रियों को वहीं रोके रखा गया। बाद में धीरे-धीरे प्रक्रिया पूरी कर उड़ान रवाना की गई।
उन्होंने बताया कि विमान के उड़ान भरने के बाद भी मन में डर बना हुआ था कि कहीं फिर से हमला न हो जाए, लेकिन कुछ घंटों बाद स्थिति सामान्य होने पर राहत महसूस हुई और वे सुरक्षित भारत पहुंच गए।
दुबई से लौटे व्यापारी सुनील कुमार ने बताया कि वहां हर चार-पांच घंटे के अंतराल पर बमबारी की आवाजें सुनाई दे रही थीं, जिससे सभी लोग सहमे हुए थे। होटल से बाहर न निकलने की सलाह दी गई थी, हालांकि कभी-कभी वे आसपास थोड़ी देर टहलने निकल जाते थे। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी ने फोन पर पूछा था कि कहीं बुर्ज खलीफा को नुकसान तो नहीं पहुंचा। तब उन्होंने उसकी तस्वीर भेजकर मजाक में कहा कि अभी वह सुरक्षित खड़ा है।
वहीं, विनित साहू ने बताया कि वे 25 फरवरी को अमीरात घूमने गए थे और 28 फरवरी को अबू धाबी से कोलकाता लौटने वाले थे, लेकिन मिसाइल हमलों के कारण सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं। एयरबेस को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था और आसपास बमबारी की आवाजें सुनाई दे रही थीं, जिससे सभी काफी भयभीत हो गए थे।
कई दिनों की चिंता और अनिश्चितता के बाद जब ये सभी लोग सुरक्षित रांची लौटे, तो परिवारों के लिए यह किसी उत्सव से कम नहीं था। इस बार शहर में होली सिर्फ रंगों की नहीं, बल्कि अपनों की सुरक्षित वापसी की खुशी के साथ मनाई जाएगी।