रांची में 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़ा और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा दाखिल डिसचार्ज पिटीशन पर सुनवाई शुरू हो चुकी है। पीएमएलए (PMLA) की विशेष अदालत में इस याचिका पर आंशिक बहस पूरी कर ली गई है, जबकि मामले में अगली सुनवाई बुधवार को निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत में पक्ष रखा। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ से जोहेब हुसैन ने दलीलें पेश कीं।
मुख्यमंत्री ने 6 दिसंबर को अदालत में डिसचार्ज याचिका दाखिल कर खुद को निर्दोष बताया था। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया है कि उन्हें इस मामले से आरोप मुक्त किया जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं और राजनीतिक वजहों से उन्हें फंसाया गया है।
ईडी इस मामले में पहले भी कई बार कार्रवाई कर चुकी है। जांच एजेंसी ने जमीन कारोबारियों समेत कई लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके अलावा ईडी ने मुख्यमंत्री को पूछताछ के लिए 10 बार समन भेजा था, जिनमें से दो बार उनसे पूछताछ की गई।
ईडी ने 31 जनवरी 2024 को लंबी पूछताछ के बाद हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद वह लगभग पांच महीने तक न्यायिक हिरासत में रहे और बाद में उन्हें अदालत से जमानत मिली।
इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत जेएमएम नेता अंतू तिर्की सहित कई जमीन कारोबारियों को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। ईडी ने केस में पहली चार्जशीट 30 मार्च 2024 को दाखिल की थी, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ बड़गाईं अंचल के निलंबित उप राजस्वकर्मी भानु प्रताप प्रसाद, आर्किटेक्ट विनोद सिंह, रैयत राजकुमार पाहन और जमीन कारोबारी हिलेरियस कच्छप को आरोपी बनाया गया था।
इसके बाद ईडी ने 7 जून 2024 को दूसरी चार्जशीट दाखिल की, जिसमें अंतू तिर्की समेत कुल 10 लोगों को आरोपी के रूप में नामजद किया गया।