झारखंड में चौबीसों घंटे संचालित होने वाली 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारियों को नवंबर और दिसंबर 2025 का वेतन अब तक नहीं मिल सका है। क्रिसमस और नववर्ष जैसे प्रमुख त्योहार गुजर जाने के बाद भी भुगतान लंबित रहने से कर्मियों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी ने बताया कि फरवरी 2025 से 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन सम्मान फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है। संस्था के जिम्मे आने के बाद से ही कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने की समस्या झेलनी पड़ रही है और भुगतान में बार-बार देरी हो रही है।
संघ के अनुसार, 22 दिसंबर 2025 को सरकार और कर्मचारी संघ के बीच हुई संयुक्त बैठक में सेवा प्रदाता संस्था के प्रतिनिधियों ने एक सप्ताह के भीतर लंबित वेतन जारी करने का भरोसा दिलाया था, लेकिन आश्वासन के बावजूद अब तक कर्मचारियों के खातों में राशि नहीं पहुंची है।
संघ ने इस स्थिति को असमान और अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि झारखंड उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत जहां सरकारी कर्मचारियों को क्रिसमस से पहले वेतन भुगतान सुनिश्चित किया गया, वहीं जीवनरक्षक 108 एंबुलेंस सेवा में कार्यरत कर्मियों को इससे वंचित रखा गया। संघ का दावा है कि यह रवैया श्रम कानूनों और संवैधानिक समानता के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
वेतन न मिलने का सीधा असर कर्मचारियों के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। बच्चों की स्कूल फीस, बैंक व फाइनेंस संस्थानों की किस्तें, घर का किराया और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना कई परिवारों के लिए मुश्किल हो गया है। संघ का कहना है कि आर्थिक दबाव के कारण अनेक कर्मियों के परिवार गंभीर संकट से गुजर रहे हैं।
संघ ने यह आरोप भी लगाया कि बैठक के बाद तैयार किए गए मिनट्स ऑफ मीटिंग में कई अहम सहमत मुद्दों को शामिल नहीं किया गया। इनमें लंबित वेतन भुगतान, निलंबित कर्मचारियों की बहाली, ईपीएफ व ईएसआईसी से जुड़ा अनुपालन और नियमित समन्वय बैठकों का प्रावधान शामिल है।
झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला और बकाया वेतन का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो संगठन को आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ेगा।