नेमरा में 108 एम्बुलेंस बनी ‘धक्का-सेवा’, सड़क हादसे में घायल महिला ने रास्ते में तोड़ा दम

नेमरा में 108 एम्बुलेंस बनी ‘धक्का-सेवा’, सड़क हादसे में घायल महिला ने रास्ते में तोड़ा दम

नेमरा में 108 एम्बुलेंस बनी ‘धक्का-सेवा’, सड़क हादसे में घायल महिला ने रास्ते में तोड़ा दम
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Feb 16, 2026, 4:32:00 PM

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। गांव में तैनात 108 एम्बुलेंस के लंबे समय से खराब पड़े होने के आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि पिछले करीब एक महीने से वाहन नियमित रूप से स्टार्ट नहीं हो रहा और आपात स्थिति में उसे चालू करने के लिए लोगों को धक्का लगाना पड़ता है।

रविवार सुबह एक सड़क दुर्घटना के बाद इसी कथित लापरवाही का खामियाजा एक घायल महिला को जान देकर चुकाना पड़ा। हादसे में कार सवार चार लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए थे, जिनमें एक महिला भी शामिल थी। घटना की सूचना बरलंगा थाना पुलिस को दी गई।

स्थानीय युवक रंजीत कुमार ने तत्काल 108 नंबर पर कॉल किया। इसके बाद बरलंगा थाना के पास खड़ी एम्बुलेंस को रवाना करने की कोशिश की गई, लेकिन वाहन हर बार की तरह बंद पड़ा था। आरोप है कि पांच से सात लोगों ने धक्का मारकर एम्बुलेंस को किसी तरह स्टार्ट कराया।

एम्बुलेंस को चालू करने में लगभग 15 से 20 मिनट लग गए। इसके बाद वाहन करीब चार किलोमीटर दूर सिल्ली मोड़ के पास दुर्घटनास्थल तक पहुंचा। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 40 मिनट बीत चुके थे, तब तक घायल सड़क पर ही दर्द से कराहते रहे।

रास्ते में फिर बंद हुई एम्बुलेंस, महिला ने तोड़ा दम

घायलों को पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से एम्बुलेंस में लादकर गोला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में एम्बुलेंस दोबारा बंद हो गई। वाहन को फिर से धक्का देकर चालू किया गया।

इसी दौरान इलाज के लिए ले जाते समय घायल महिला की रास्ते में ही मौत हो गई।

घटना के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में बदइंतजामी, वेंटिलेटर और दवाइयों की कमी, जर्जर सड़कें और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही लगातार लोगों की जान ले रही है। मरांडी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के अपने पैतृक गांव में भी स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है और स्वास्थ्य मंत्री की संवेदनहीनता ने ग्रामीणों को “खाट-एम्बुलेंस” के सहारे छोड़ दिया है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एम्बुलेंस का नियमित रखरखाव कराना इतना मुश्किल काम है? साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि क्या ग्रामीण और आदिवासी समाज को केवल सत्ता तक पहुंचने का जरिया बनाकर छोड़ दिया गया है? मरांडी के अनुसार, इस तरह की घटनाएं सरकार की प्राथमिकताओं और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।