झारखंड के पलामू जिले में नवजात शिशु को बेचने की घटना ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को गंभीर चिंता में डाल दिया है। आयोग ने इस मामले में जिला प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उपायुक्त (डीसी) से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत और प्रमाण-समर्थित रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आयोग का कहना है कि अब तक दिए गए जवाब में प्रशासन अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज पेश करने में विफल रहा है।
यह मामला लेस्लीगंज प्रखंड के लोटवा गांव से जुड़ा है, जहां पिंकी देवी नामक महिला ने कथित तौर पर आर्थिक बदहाली के चलते अपने नवजात को बेच दिया। शिकायत में उल्लेख है कि परिवार के पास बुनियादी सरकारी दस्तावेज जैसे राशन कार्ड तक नहीं थे और वे मंदिर परिसर के एक अस्थायी शेड में जीवन यापन कर रहे थे। आरोप यह भी है कि प्रशासनिक सहायता के नाम पर परिवार को केवल सीमित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया, जबकि उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय बनी रही।
आयोग ने पहले भी इस प्रकरण में जिला प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। इसके जवाब में प्रशासन ने दावा किया कि पीड़ित परिवार को कई सरकारी योजनाओं का लाभ दिया गया है, जिनमें बच्चों का स्कूल में दाखिला, आंगनवाड़ी से पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं, राशन कार्ड, बैंक खाता और मनरेगा जॉब कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा, आवास योजना के तहत जमीन उपलब्ध कराने की बात भी कही गई।
लेकिन NHRC ने इन दावों की समीक्षा के बाद पाया कि लाभों के वास्तविक क्रियान्वयन से जुड़े ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि राशन वितरण, मजदूरी भुगतान या अन्य सहायता के प्रमाण के अभाव में प्रशासन की रिपोर्ट अधूरी और असंतोषजनक है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने निर्देश दिया है कि 4 जून 2026 तक सभी दावों के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य सहित एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। अब इस संवेदनशील प्रकरण में यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन किस तरह अपनी जिम्मेदारी निभाता है और पीड़ित परिवार को वास्तविक राहत पहुंचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।