मेदिनीनगर : NEET परीक्षा में भारी चूक! घंटों इंतजार के बाद फोटोकॉपी पेपर से हुई शुरुआत, अभ्यर्थियों में आक्रोश

मेदिनीनगर : NEET परीक्षा में भारी चूक! घंटों इंतजार के बाद फोटोकॉपी पेपर से हुई शुरुआत, अभ्यर्थियों में आक्रोश

मेदिनीनगर : NEET परीक्षा में भारी चूक! घंटों इंतजार के बाद फोटोकॉपी पेपर से हुई शुरुआत, अभ्यर्थियों में आक्रोश
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: May 04, 2026, 10:05:00 AM

मेदिनीनगर के योध सिंह नामधारी महिला कॉलेज स्थित परीक्षा केंद्र पर रविवार को आयोजित NEET UG परीक्षा के दौरान गंभीर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई। राष्ट्रीय स्तर की इस महत्वपूर्ण परीक्षा में एक कक्ष के दर्जनों परीक्षार्थियों को निर्धारित समय पर प्रश्न-पत्र ही उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे पूरे दिन अव्यवस्था का माहौल बना रहा।

जानकारी के अनुसार, कक्ष संख्या 11 में बैठे 48 अभ्यर्थी समय से पहले ही केंद्र पर पहुंच गए थे, लेकिन दोपहर 2 बजे परीक्षा शुरू होने के बावजूद उन्हें प्रश्न-पत्र नहीं दिया गया। समय बीतने के साथ छात्रों की बेचैनी बढ़ती गई और शाम तक भी स्थिति जस की तस बनी रही। लगभग साढ़े पांच बजे एक छात्रा केंद्र से बाहर निकलकर रोते हुए अभिभावकों को स्थिति की जानकारी देने पहुंची, जिसके बाद बाहर मौजूद लोगों का आक्रोश फूट पड़ा।

अभिभावकों ने केंद्र प्रशासन पर सूचना छिपाने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस और परिजनों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। अभिभावकों का कहना था कि उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए शाम करीब 6 बजे के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत और पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। अधिकारियों के अनुसार, देरी की वजह भाषा से जुड़ी तकनीकी समस्या थी, जिसे बाद में सुलझाया गया।

आखिरकार प्रश्न-पत्र की प्रतियां तैयार कर अभ्यर्थियों को वितरित की गईं और परीक्षा शाम करीब 6:55 बजे शुरू हो सकी। यह परीक्षा रात लगभग 9:55 बजे तक चली। इस दौरान प्रभावित छात्रों को करीब 10 घंटे तक केंद्र परिसर में ही इंतजार करना पड़ा।

गौरतलब है कि अन्य कक्षों में परीक्षा निर्धारित समय पर संपन्न कराकर छात्रों को घर भेज दिया गया था, जबकि इस कक्ष के अभ्यर्थियों को लंबे समय तक रोके रखा गया। इस घटना ने परीक्षा प्रबंधन और समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब यह देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक मानी जाती है।