पलामू जिले के हुसैनाबाद में खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी बताने वाला एक व्यक्ति पुलिस की सतर्कता में फंस गया। आरोपी की पहचान राजेश कुमार के रूप में हुई है, जो पलामू के हैदरनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत कुकही गांव का निवासी है। राजेश दो जनवरी को हुसैनाबाद थाना पहुंचा था, जहां उसने स्वयं को 2014 बैच का ओडिशा कैडर आईएएस अधिकारी बताते हुए भुवनेश्वर स्थित खरेवाला नगर में सीएओ पद पर कार्यरत होने का दावा किया।
बातचीत में बढ़ा शक, सवालों में उलझा ‘अफसर’
थाना परिसर में हुसैनाबाद थाना प्रभारी से बातचीत के दौरान राजेश की कथित पोस्टिंग को लेकर सवाल उठे। उसने कहा कि वह भुवनेश्वर के अलावा देहरादून और हैदराबाद में भी काम कर चुका है। जब थाना प्रभारी ने तीन अलग-अलग राज्यों में तैनाती को लेकर स्पष्टता मांगी, तो राजेश ने जवाब दिया कि आईएएस अधिकारी यूपीएससी कैडर से होते हैं, इसलिए ऐसा संभव है। हालांकि उसके जवाबों में विरोधाभास और स्पष्ट जानकारी का अभाव पुलिस को खटकने लगा।
दस्तावेज नहीं दिखा पाया, फर्जी आईडी बरामद
शक गहराने पर पुलिस ने उससे पहचान पत्र और नियुक्ति से जुड़े कागजात मांगे, लेकिन राजेश कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। तलाशी के दौरान उसके पास से एक फर्जी आईएएस पहचान पत्र बरामद हुआ। इतना ही नहीं, वह जिस वाहन से घूम रहा था, उस पर “गवर्नमेंट ऑफ इंडिया, सीएओ, टेलीकम्युनिकेशन डिपार्टमेंट” लिखा हुआ था, जिससे वह प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहा था।
छह-सात साल से चल रहा था अफसर बनने का नाटक
हुसैनाबाद के एसडीपीओ मोहम्मद याकूब ने बताया कि जांच में स्पष्ट हो गया है कि राजेश कुमार फर्जी तरीके से खुद को आईएएस अधिकारी बताकर वर्षों से लोगों को भ्रमित कर रहा था। पूछताछ में सामने आया कि उसके पिता का सपना था कि वह आईएएस बने। इसी लक्ष्य के तहत राजेश ने यूपीएससी की परीक्षा चार बार दी, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद वह बीते छह से सात वर्षों से खुद को आईएएस अधिकारी बताकर घूम रहा था और प्रभावशाली काम निकलवाने की कोशिश कर रहा था।
गंभीर धाराओं में केस दर्ज
पूरे मामले में हुसैनाबाद थाना में राजेश कुमार के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस फर्जी पहचान के जरिए उसने पहले किन-किन लोगों और संस्थानों को गुमराह किया और क्या किसी प्रकार का लाभ उठाया गया।