123वीं जयंती पर याद किये गये मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा, टकरा में दी गई श्रद्धांजलि

123वीं जयंती पर याद किये गये मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा, टकरा में दी गई श्रद्धांजलि

123वीं जयंती पर याद किये गये मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा, टकरा में दी गई श्रद्धांजलि
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jan 03, 2026, 6:08:00 PM

खूंटी जिले के टकरा गांव में आज 3 जनवरी को मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 123वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष एवं आंदोलनकारी नेता देवेन्द्र नाथ महतो टकरा पहुंचे और जयपाल सिंह मुंडा के समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

ग्रामीणों की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, फुटबॉल प्रतियोगिता और श्रद्धांजलि सभा शामिल रही। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।

सभा को संबोधित करते हुए देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा का जीवन शिक्षा, खेल और राजनीति—तीनों क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियों का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि सुदूर जंगल-पहाड़ों से निकलकर जयपाल सिंह मुंडा ने विश्वविख्यात ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की और प्रतिष्ठित आईसीएस परीक्षा उत्तीर्ण की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने भारतीय हॉकी टीम का गठन किया और यूरोप व ब्रिटेन के कई विश्वविद्यालय टूर्नामेंटों में विजय दिलाई। वर्ष 1928 के ओलंपिक खेलों में भारत को पहला हॉकी स्वर्ण पदक दिलाकर उन्होंने देश को अंतरराष्ट्रीय गौरव प्रदान किया।

देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि शिक्षा और खेल में शिखर तक पहुंचने के बावजूद जयपाल सिंह मुंडा झारखंड की धरती पर हो रहे शोषण और अन्याय से विचलित रहे। इसी पीड़ा से प्रेरित होकर उन्होंने झारखंडियों को संगठित किया और अलग झारखंड राज्य के आंदोलन को दिशा देने के लिए झारखंड पार्टी की स्थापना की। उन्होंने राजनीतिक चेतना का जो बीज बोया, उसका परिणाम यह रहा कि कांग्रेस की प्रबल लहर के बावजूद स्वतंत्र भारत के पहले विधानसभा चुनाव में झारखंड पार्टी ने 32 सीटें और लोकसभा में चार सीटें जीतकर देश को चौंका दिया।

वक्ताओं ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा आजीवन संघर्ष और आत्मसम्मान के प्रतीक रहे। अलग झारखंड राज्य की अवधारणा उनकी दूरदृष्टि और आंदोलन की ही देन है। कार्यक्रम में यह मांग भी उठी कि उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाए और उनकी संघर्षगाथा को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।

कार्यक्रम में मनीष कुमार साहू, कुमार ब्रजकिशोर, विक्रम महतो, पवन कुमार, विजय नायक, विश्वकर्मा उरांव, विजय कुमार सिंह, जयंत जायसवाल, बजरंगी कुमार साहू, वीरेंद्र कुमार महतो, गुलशन मुंडा, जॉब कश्यप, प्रकाश नाग, दिलीप तिर्की, कल्याण लिंडा, चैतून कश्यप, मनोज कश्यप, सुमित कश्यप सहित कई सामाजिक प्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे।