हजारीबाग में कुप्रथाओं के खिलाफ एकजुट हुए लोग, कुसुम्भा गांव में निकली जागरूकता रैली

हजारीबाग में कुप्रथाओं के खिलाफ एकजुट हुए लोग, कुसुम्भा गांव में निकली जागरूकता रैली

हजारीबाग में कुप्रथाओं के खिलाफ एकजुट हुए लोग, कुसुम्भा गांव में निकली जागरूकता रैली
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 07, 2026, 1:39:00 PM

हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड के कुसुम्भा गांव में हाल में हुई एक मासूम बच्ची की हत्या ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस दुखद घटना के बाद अब गांव में सामाजिक जागरूकता की दिशा में ठोस पहल शुरू हो गई है, जिससे बदलाव की स्पष्ट झलक दिखाई दे रही है।

घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान तेज कर दिया है। विष्णुगढ़ पुलिस की पहल पर प्रखंड स्तर पर लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जेएसएलपीएस से जुड़ी बीपीएम दिव्या सिन्हा के नेतृत्व में कुसुम्भा सखी मंडल ने अंधविश्वास और उससे जुड़ी कुप्रथाओं के खिलाफ एक जनजागरण रैली का आयोजन किया।

इस रैली में गांव के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। महिलाएं, पुरुष और किशोरियां बड़ी संख्या में इसमें शामिल हुए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि अब ग्रामीण समाज इन कुरीतियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्र से शुरू हुई यह रैली गांव के अलग-अलग हिस्सों से गुजरते हुए पुनः प्रारंभिक स्थल पर समाप्त हुई।

रैली के दौरान प्रतिभागियों ने अंधविश्वास, डायन प्रथा, जादू-टोना और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जोरदार नारे लगाए। पूरे गांव में जागरूकता का संदेश गूंजता रहा और लोगों को वैज्ञानिक सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिव्या सिन्हा ने कहा कि हालिया घटना ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। हालांकि अब ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ रही है और वे इन कुप्रथाओं के दुष्परिणाम समझने लगे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए समाज को मिलकर प्रयास करना होगा।

इस अभियान को सफल बनाने में सामुदायिक समन्वयक विजय कुमार की अहम भूमिका रही। इसके अलावा कई स्थानीय महिलाएं और पुलिस कर्मी भी इसमें सक्रिय रूप से शामिल हुए।

यह पहल केवल एक रैली तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे गांव में सामाजिक बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। कुसुम्भा में अब अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता की जो लहर उठी है, वह आने वाले समय में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा तय कर सकती है।