हजारीबाग में शिक्षा तंत्र पर उठे सवाल, अवैध निजी स्कूलों और दोहरे नामांकन से उजागर हुई बड़ी अनियमितताएं

हजारीबाग में शिक्षा तंत्र पर उठे सवाल, अवैध निजी स्कूलों और दोहरे नामांकन से उजागर हुई बड़ी अनियमितताएं

हजारीबाग में शिक्षा तंत्र पर उठे सवाल, अवैध निजी स्कूलों और दोहरे नामांकन से उजागर हुई बड़ी अनियमितताएं
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 23, 2026, 2:28:00 PM

झारखंड के हजारीबाग जिले में शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। ताजा जानकारी में सामने आया है कि जिले में कई निजी शिक्षण संस्थान बिना वैध मान्यता और आधिकारिक पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों के पास न तो सरकार द्वारा जारी आवश्यक अनुमति है और न ही यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (यू-डाइस) कोड, जो किसी भी स्कूल की वैधता का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। इसके बावजूद ये संस्थान नियमित रूप से बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं, जिससे व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच में एक और चिंताजनक पहलू सामने आया है, जिसमें इन निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का नाम सरकारी विद्यालयों के रिकॉर्ड में दर्ज दिखाया जा रहा है। यानी वास्तविकता में छात्र निजी संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि कागजी तौर पर उन्हें सरकारी स्कूलों का विद्यार्थी बताया जा रहा है। इस तरह की दोहरी व्यवस्था से सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ गई है। पोशाक वितरण, छात्रवृत्ति, साइकिल योजना और मध्यान्ह भोजन जैसी सुविधाओं का लाभ उन नामों पर उठाया जा रहा है, जो वास्तविक रूप से सरकारी स्कूलों में उपस्थित ही नहीं हैं।

मामले का एक और महत्वपूर्ण आयाम यह है कि कुछ छात्र निजी स्कूलों में पढ़ते हुए भी सरकारी विद्यालयों के प्रमाणपत्र के आधार पर नवोदय जैसे प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए पात्र बन रहे हैं। जबकि नियमानुसार, इन संस्थानों में प्रवेश के लिए छात्र का नियमित रूप से सरकारी स्कूल में अध्ययनरत होना अनिवार्य है। इस प्रकार नियमों को दरकिनार कर पात्रता हासिल करने की यह प्रक्रिया पूरी प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।

शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देश स्पष्ट रूप से कहते हैं कि किसी भी छात्र का एक समय में केवल एक ही विद्यालय में नामांकन वैध माना जाएगा। इसके बावजूद जिले में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर दोहरे नामांकन की व्यवस्था चल रही है। कुछ निजी संस्थानों द्वारा अन्य स्कूलों के कोड का इस्तेमाल कर स्वयं को अधिकृत दिखाने की भी बात सामने आई है, जबकि कई स्कूल बिना किसी औपचारिक अनुमति के ही संचालित हो रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इतने बड़े स्तर पर चल रही इन अनियमितताओं पर अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह एक अहम प्रश्न बन गया है। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह स्थिति केवल लापरवाही का परिणाम है या इसके पीछे कोई संगठित तंत्र सक्रिय है।