हजारीबाग में सामने आए बहुचर्चित वनभूमि घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने जांच को आगे बढ़ाते हुए बड़ा कदम उठाया है। ब्यूरो ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें जिले के तत्कालीन उपायुक्त (डीसी) विनय कुमार चौबे, नेक्सजेन कंपनी के संचालक विनय कुमार सिंह और हजारीबाग सदर के पूर्व अंचलाधिकारी (सीओ) शैलेश कुमार सिंह को आरोपी बनाया गया है।
एसीबी की ओर से यह आरोपपत्र भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत दायर किया गया है। चार्जशीट हजारीबाग अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय सह विशेष न्यायालय (निगरानी) की न्यायाधीश आशा देवी भट्ट की अदालत में प्रस्तुत की गई है।
चार्जशीट के अनुसार, घोटाले में वनभूमि की वास्तविक प्रकृति को दस्तावेजों में बदलकर दिखाया गया और फर्जी कागजात के सहारे जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। जांच में दावा किया गया है कि विनय चौबे के डीसी रहते 5000 एकड़ से अधिक वनभूमि, ट्रस्ट की जमीन और गैर मजरुआ जमीन को कथित रूप से अवैध तरीके से बेच दिया गया।
निगरानी विभाग की जांच में इस मामले में कुल 73 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। एसीबी ने अदालत में चार्जशीट के साथ केस डायरी और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी सौंपे हैं।
जांच के दौरान सदर अंचल के तत्कालीन सीओ, अन्य अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। बताया गया है कि इन बयानों में विनय चौबे की भूमिका को लेकर कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
एसीबी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि वनभूमि की रजिस्ट्री विनय कुमार सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह के नाम पर कराई गई थी। एजेंसी का मानना है कि जमीन की खरीद-बिक्री एक सुनियोजित तरीके से की गई।
चार्जशीट में विनय चौबे की पत्नी स्वप्ना संचिता के बैंक खाते का उल्लेख भी किया गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2010 से 2013 के बीच उनके खाते में करीब 3.16 करोड़ रुपये का लेनदेन दर्ज किया गया। एसीबी अब इस राशि का कथित जमीन घोटाले से सीधा संबंध तलाशने में जुटी है।
अब अदालत द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद इस मामले में ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। माना जा रहा है कि सुनवाई के दौरान इस बड़े भूमि घोटाले से जुड़े कई और तथ्य सामने आ सकते हैं।
गौरतलब है कि इस मामले में हजारीबाग सदर के तत्कालीन अंचलाधिकारी शैलेश कुमार सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद अन्य आरोपियों की कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।