हजारीबाग अवैध खनन मामले में केंद्र ने अपनाया सख्त रुख, राज्य सरकार को भेजा नोटिस

हजारीबाग अवैध खनन मामले में केंद्र ने अपनाया सख्त रुख, राज्य सरकार को भेजा नोटिस

हजारीबाग अवैध खनन मामले में केंद्र ने अपनाया सख्त रुख, राज्य सरकार को भेजा नोटिस
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jan 08, 2026, 1:04:00 PM

केंद्र सरकार ने झारखंड में हजारीबाग जिले के 156 हेक्टेयर क्षेत्र में अवैध खनन की पुष्टि के बावजूद वन विभाग की निष्क्रियता पर कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने राज्य सरकार को रिमाइंडर जारी कर कहा है कि हजारीबाग के क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (RCCF) के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच कर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मंत्रालय की यह कार्रवाई CPGRAM पोर्टल पर दर्ज एक सार्वजनिक शिकायत के बाद हुई है। शिकायतकर्ता शनि कांत ने आरोप लगाया था कि अवैध खनन की पुष्टि होने के बावजूद वन विभाग और राज्य सरकार ने किसी ठोस कदम नहीं उठाए और संबंधित अधिकारी को उच्च स्तर का संरक्षण प्राप्त है।

केंद्र द्वारा भेजे गए रिमाइंडर में उल्लेख है कि इस मामले पर पहले 23 दिसंबर 2025 को पत्र भेजा गया था, लेकिन न तो किसी कार्रवाई हुई और न ही संतोषजनक जवाब मिला। इस वजह से मंत्रालय ने अब दोबारा समीक्षा कर तुरंत कदम उठाने का निर्देश दिया है। यह पत्र 5 जनवरी 2026 को मंत्रालय के वैज्ञानिक ‘ई’ चारण जीत सिंह द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित किया गया, और इसकी कॉपी झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक, FCA नोडल अधिकारी और केंद्रीय वन उप महानिदेशक (रांची) को भी भेजी गई।

जांच में सामने आया कि हजारीबाग के तत्कालीन पश्चिमी वन प्रमंडल पदाधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध खनन में शामिल कंपनियों, विशेषकर NTPC और त्रिवेणी सैनिक माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड, को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी नियमों और रिपोर्ट में महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया।

विशेष रूप से दुमुहानी नाले में अवैध खनन के दौरान, वन विभाग की रिपोर्ट में नाले की चौड़ाई 20 से 30 मीटर बताई गई थी। हालांकि, नाला डाइवर्ट करने की प्रक्रिया में इसे घटाकर केवल 4 से 5 मीटर दिखाया गया, जो स्पष्ट रूप से पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है।

केंद्र सरकार का रिमाइंडर यह स्पष्ट संदेश देता है कि राज्य स्तर पर किसी भी अधिकारी की निष्क्रियता या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और अवैध खनन जैसे पर्यावरणीय अपराधों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।