गोड्डा : लोकनृत्य, गीत और भित्ति चित्रों से सजे गांव, अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से सोहराय का भव्य आयोजन

गोड्डा : लोकनृत्य, गीत और भित्ति चित्रों से सजे गांव, अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से सोहराय का भव्य आयोजन

गोड्डा : लोकनृत्य, गीत और भित्ति चित्रों से सजे गांव, अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से सोहराय का भव्य आयोजन
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jan 19, 2026, 6:42:00 PM

झारखंड के गोड्डा जिले में आदिवासी समाज के पारंपरिक पर्व सोहराय को सामुदायिक विकास कार्यक्रम के तहत अदाणी फाउंडेशन द्वारा व्यापक स्तर पर मनाया गया। यह सांस्कृतिक आयोजन 9 से 18 जनवरी 2026 के बीच जिले के चार प्रखंडों—महागामा, बोआरीजोर, ठाकुरगंगटी और गोड्डा के नौ आदिवासी बहुल गांवों में आयोजित किया गया, जिसमें एक हजार से अधिक ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

महागामा प्रखंड के गोविंदपुर और करनू, बोआरीजोर के जिरली व गोराडीह, ठाकुरगंगटी के बहादुरचक तथा गोड्डा प्रखंड के रानीडीह, गंगटा, नायाबाद और पेटबी (संथाली) गांवों में सोहराय उत्सव की खास रौनक रही। इन गांवों में हुए आयोजनों ने आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और जीवनशैली को जीवंत रूप में सामने रखा।

सोहराय पर्व आदिवासी समुदाय के लिए केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि कृषि, पशुधन और प्रकृति के साथ उनके आत्मीय संबंधों का प्रतीक है। यह पर्व अच्छी फसल, पशुओं की उन्नति और प्राकृतिक संतुलन के लिए कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर होता है। पर्व के दौरान गांवों में घरों की साफ-सफाई की गई और दीवारों पर पारंपरिक सोहराय चित्रकारी की गई। साथ ही पशुधन की विधिवत पूजा कर उनके प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया गया।

उत्सव के मौके पर ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से स्वास्थ्य, समृद्धि और सामाजिक सौहार्द की कामना की। पारंपरिक परिधानों में सजे महिला-पुरुषों ने लोक गीतों और नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। मांदर, ढोल, नगाड़ा और बांसुरी की लय पर किए गए नृत्यों में शिकार, खेती, मौसम चक्र और आदिवासी सामाजिक जीवन से जुड़े दृश्य प्रभावी ढंग से उभरकर सामने आए।

इस आयोजन के माध्यम से अदाणी फाउंडेशन ने आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। कार्यक्रम के जरिए आपसी भाईचारे, सामुदायिक एकता और प्रकृति संरक्षण के संदेश को भी मजबूती मिली, जो सोहराय पर्व की मूल भावना है। ग्रामीणों ने इस पहल के लिए अदाणी फाउंडेशन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक प्रयास समुदाय को जोड़ने के साथ-साथ युवा पीढ़ी में अपनी परंपराओं और विरासत के प्रति गर्व की भावना को भी सशक्त करते हैं।