गढ़वा : जंगल से लौट रही महिला को हाथी ने कुचलकर मारा, स्थायी समाधान पर फिर उठे सवाल

गढ़वा : जंगल से लौट रही महिला को हाथी ने कुचलकर मारा, स्थायी समाधान पर फिर उठे सवाल

गढ़वा : जंगल से लौट रही महिला को हाथी ने कुचलकर मारा, स्थायी समाधान पर फिर उठे सवाल
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jan 20, 2026, 11:08:00 AM

गढ़वा जिले के चिनियां थाना क्षेत्र में जंगली हाथियों की गतिविधियां लगातार जानलेवा साबित हो रही हैं। ताजा घटना बेता पंचायत के सिदे गांव की है, जहां हाथी के हमले में एक वृद्ध महिला की मौके पर ही मौत हो गई। मृतका की पहचान 60 वर्षीय जीरवा देवी के रूप में हुई है, जो सिदे गांव निवासी मोतीलाल कोरवा की पत्नी थीं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जीरवा देवी गांव की एक किशोरी के साथ बकरी चराने के लिए पास के जंगल गई थीं। शाम के समय जब दोनों लौट रही थीं, तभी अचानक उनका सामना जंगली हाथी से हो गया। हाथी ने जीरवा देवी पर हमला कर दिया और उन्हें बुरी तरह कुचल दिया, जिससे घटनास्थल पर ही उनकी जान चली गई। साथ मौजूद किशोरी किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रही और गांव पहुंचकर लोगों को घटना की सूचना दी।

घटना की खबर मिलते ही सिदे गांव समेत आसपास के क्षेत्रों में दहशत फैल गई। ग्रामीणों की सूचना पर गांव वन समिति अध्यक्ष ने तुरंत चिनियां वन विभाग को जानकारी दी। इसके बाद वन विभाग और हाथी नियंत्रण दल की टीम रात में ही जंगल पहुंची और शव को कब्जे में लेकर चिनियां वन कार्यालय लाई।

इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे चिनियां थाना क्षेत्र में भय का माहौल है। स्थानीय मुखिया का कहना है कि हाथी लगातार रिहायशी इलाकों में घुसकर लोगों की जान और संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं, लेकिन उन्हें रोकने के लिए अब तक कोई ठोस और स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है।

वहीं, क्षेत्र के भाजपा विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी योजना बनाई जानी चाहिए जिससे हाथियों को आबादी वाले इलाकों में आने की जरूरत ही न पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में दी जाने वाली चार लाख रुपये की मुआवजा राशि अपर्याप्त है और इसे कम से कम 20 लाख रुपये किया जाना चाहिए।

घटना के बाद वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतका के परिजनों को तत्काल 50 हजार रुपये की नगद सहायता प्रदान की है और आगे की मुआवजा प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। हालांकि, इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जंगली हाथियों से स्थायी तौर पर लोगों की सुरक्षा कब सुनिश्चित की जाएगी।