जादूगोड़ा यूरेनियम खनन पर राष्ट्रपति भवन सख्त, झारखंड सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

जादूगोड़ा यूरेनियम खनन पर राष्ट्रपति भवन सख्त, झारखंड सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

जादूगोड़ा यूरेनियम खनन पर राष्ट्रपति भवन सख्त, झारखंड सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: May 07, 2026, 2:50:00 PM

पूर्वी सिंहभूम के जादूगोड़ा स्थित यूरेनियम खनन क्षेत्र में आदिवासी आबादी के स्वास्थ्य, पर्यावरणीय नुकसान और विस्थापन से जुड़े आरोप अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजी गई एक शिकायत पर राष्ट्रपति सचिवालय ने झारखंड सरकार से जवाब तलब किया है और मामले में की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी मांगी है।

यह पहल रामगढ़ के अधिवक्ता एवं सरकारी वकील संजीव कुमार अंबष्ठा की ओर से दायर याचिका के बाद हुई। राष्ट्रपति सचिवालय के अवर सचिव लक्ष्मी महारा भूषणम ने राज्य के मुख्य सचिव को ई-मेल के माध्यम से निर्देश दिया कि शिकायत में उठाए गए बिंदुओं की जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएं। साथ ही कार्रवाई रिपोर्ट याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने को भी कहा गया है। सचिवालय ने संकेत दिया कि मामला गंभीर सार्वजनिक हित से जुड़ा है और इसे प्राथमिकता के साथ देखा जाना चाहिए।

स्वास्थ्य संकट और प्रदूषण को लेकर चिंता

याचिका में आरोप लगाया गया है कि जादूगोड़ा और उसके आसपास के गांवों में दशकों से जारी यूरेनियम खनन गतिविधियों का असर स्थानीय आदिवासी समुदायों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। शिकायत में कैंसर, जन्म से शारीरिक विकृतियां, त्वचा संबंधी बीमारियां, सांस की दिक्कतें और बांझपन जैसे मामलों में वृद्धि की बात कही गई है।

इसके अलावा भूजल स्रोतों, खेती योग्य जमीन और कृषि उत्पादन पर रेडियोधर्मी प्रदूषण के संभावित प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई गई है। याचिका में कहा गया है कि क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है।

श्रमिक सुरक्षा पर भी उठे सवाल

यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) की खदानों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी शिकायत दर्ज की गई है। आरोप है कि स्थानीय श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जा रहे हैं और विकिरण से बचाव संबंधी प्रशिक्षण व नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है।

स्वतंत्र जांच और पुनर्वास की मांग

याचिकाकर्ता ने राष्ट्रपति से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इसके तहत क्षेत्र में व्यापक स्वास्थ्य सर्वेक्षण, जल और मिट्टी की वैज्ञानिक जांच, प्रभावित लोगों के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधा तथा विस्थापित परिवारों के समुचित पुनर्वास की मांग शामिल है। आदिवासी समुदायों के लिए विशेष राहत एवं कल्याण पैकेज लागू करने की अपील भी की गई है।

राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद जादूगोड़ा क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार जांच और राहत उपायों को लेकर आगे क्या कदम उठाती है।