दुमका में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बयान को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा की गई टिप्पणी पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश कांग्रेस के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने मरांडी के बयान को निराधार, भ्रामक और आदिवासी समाज की भावनाओं को भड़काने वाला करार दिया।
आलोक दूबे ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दुमका में कोई भी उकसाने वाला बयान नहीं दिया, बल्कि उन्होंने असम के चाय बागानों में वर्षों से संघर्ष कर रहे झारखंडी आदिवासियों की पीड़ा और उनके संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा उठाया। दूबे ने आरोप लगाया कि इस विषय को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना बाबूलाल मरांडी की पुरानी आदत बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज किसी भी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है, लेकिन वास्तविकता यह है कि भाजपा शासनकाल में आदिवासियों का सबसे अधिक राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग किया गया। दूबे के अनुसार, अब जब झारखंड सरकार आदिवासी अधिकारों और सम्मान की बात कर रही है, तो विपक्ष को यह स्वीकार नहीं हो रहा।
भाजपा शासन पर साधा निशाना
कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि मरांडी आज आदिवासी हितों की दुहाई दे रहे हैं, लेकिन सत्ता में रहते हुए उन्होंने वनाधिकार कानून में बदलाव का प्रयास किया था। उन्होंने यह भी कहा कि जिन समस्याओं को लेकर विपक्ष वर्तमान सरकार पर सवाल उठा रहा है, उनमें से अधिकांश केंद्र सरकार की नीतियों और उसकी विफलताओं से जुड़ी हैं।
पेसा कानून को लेकर विपक्ष की आलोचना पर आलोक दूबे ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी स्वशासन को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि ग्रामसभा, पारंपरिक व्यवस्था और स्थानीय अधिकारों को कानूनी संरक्षण देने के लिए जो कदम मौजूदा सरकार ने उठाए हैं, वैसा पहले कभी देखने को नहीं मिला।
शिबू सोरेन के नाम पर राजनीति का आरोप
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि झारखंड आंदोलन और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक शिबू सोरेन के नाम को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना विपक्ष की नैतिक कमजोरी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन की भावना आज भी जीवित है और वह वर्तमान सरकार की नीतियों में नजर आती है, न कि विरोधियों के बयानबाजी में।
कांग्रेस नेता ने कहा कि आदिवासी समाज अब अधिक जागरूक है और संगठित होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है। इसी वजह से विपक्ष को आदिवासी एकजुटता की बात भी राजनीतिक उकसावे जैसी लगने लगी है।
अंत में आलोक दूबे ने दोहराया कि कांग्रेस और झामुमो आदिवासी समाज के सम्मान, अधिकार और संवैधानिक सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि जनता को गुमराह करने की किसी भी कोशिश का जवाब तथ्यों के साथ दिया जाता रहेगा।