12 साल बाद साकार होगा सपना! दुमका में बन रहा आधुनिक तारामंडल, 150 लोग एक साथ देख सकेंगे ब्रह्मांड

12 साल बाद साकार होगा सपना! दुमका में बन रहा आधुनिक तारामंडल, 150 लोग एक साथ देख सकेंगे ब्रह्मांड

12 साल बाद साकार होगा सपना! दुमका में बन रहा आधुनिक तारामंडल, 150 लोग एक साथ देख सकेंगे ब्रह्मांड
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 07, 2026, 5:27:00 PM

झारखंड की उपराजधानी दुमका के लोगों को जल्द ही एक अत्याधुनिक और तकनीक से लैस तारामंडल (प्लैनेटेरियम) की सुविधा मिलने वाली है। इस परियोजना का काम अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और इसका डेमो भी शुरू कर दिया गया है। जिला उपायुक्त अभिजीत सिन्हा के अनुसार, बहुत जल्द आम लोग यहां आकर तारों, ग्रहों और ब्रह्मांड से जुड़ी कई रोचक जानकारियों का अनुभव कर सकेंगे।

जापान के विशेषज्ञ कर रहे तकनीकी काम

तारामंडल में लगाए जा रहे आधुनिक उपकरण जापान की प्रतिष्ठित कंपनी आरएसए कोसमोस के सहयोग से कोनिका-मिनोल्टा द्वारा इंस्टॉल किए जा रहे हैं। इन उपकरणों की स्थापना और परीक्षण के लिए जापान से आए दो विशेषज्ञ; मिस्टर ताकेदा और मिस्टर उमेदा पिछले लगभग एक महीने से दुमका में मौजूद हैं। उनके साथ भारतीय वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ भी इस काम में सहयोग कर रहे हैं।

यह तारामंडल दुमका के गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक परिसर में बनाया जा रहा है। भवन का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है और फिलहाल उपकरणों की स्थापना का काम चल रहा है। इसके बाद अंदरूनी सजावट और अन्य अंतिम तैयारियां पूरी की जाएंगी।

डिजिटल तकनीक से लैस होगा प्लैनेटेरियम

दुमका में तैयार हो रहा यह प्लैनेटेरियम पूरी तरह आधुनिक डिजिटल तकनीक पर आधारित होगा। करीब 15 मीटर व्यास वाली विशाल डोम स्क्रीन पर ग्रह-नक्षत्रों और अंतरिक्ष से जुड़े दृश्य दिखाए जाएंगे। इसमें एक साथ लगभग 150 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी।

यहां हाइब्रिड तकनीक पर आधारित आधुनिक ऑप्टो-मेकैनिकल प्रोजेक्टर सिस्टम लगाया जा रहा है, जिसके जरिए दर्शकों को ब्रह्मांड के अद्भुत नजारे बेहद वास्तविक तरीके से देखने को मिलेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी दृष्टि से यह रांची के प्लैनेटेरियम से भी अधिक उन्नत होगा।

शिक्षा और पर्यटन दोनों को मिलेगा बढ़ावा

तारामंडल शुरू होने के बाद दुमका और आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़ी जानकारियां प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलेगा। किताबों से परे वे ब्रह्मांड से जुड़े विषयों को दृश्य माध्यम से बेहतर ढंग से सीख सकेंगे।

इसके साथ ही यह स्थान दुमका के लिए एक नया शैक्षणिक केंद्र बनने के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।

2014 में रखी गई थी नींव

इस परियोजना की आधारशिला वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रखी थी। हालांकि निर्माण कार्य में कई वर्षों तक धीमी प्रगति के कारण परियोजना लंबित रही। अब करीब 12 साल के लंबे इंतजार के बाद इसका निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है।

उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने बताया कि परियोजना को जल्द पूरा करने के लिए सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्टर और अन्य उपकरणों की स्थापना तेजी से हो रही है, जिससे जल्द ही दुमका के लोगों को इस नई सुविधा का लाभ मिल सकेगा।