डिजिटल निजता के उल्लंघन पर हाईकोर्ट सख्त, पत्नी के हक में फैसला; जानिये क्या है मामला

डिजिटल निजता के उल्लंघन पर हाईकोर्ट सख्त, पत्नी के हक में फैसला; जानिये क्या है मामला

डिजिटल निजता के उल्लंघन पर हाईकोर्ट सख्त, पत्नी के हक में फैसला; जानिये क्या है मामला
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jan 14, 2026, 5:08:00 PM

झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि पति द्वारा पत्नी की निजी और संवेदनशील तस्वीरों को बिना इजाजत अपने पास रखना और उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी देना कानूनन मानसिक क्रूरता माना जाएगा। अदालत ने कहा कि ऐसा कृत्य न सिर्फ निजता का उल्लंघन है, बल्कि महिला के सम्मान और चरित्र को ठेस पहुंचाने का गंभीर प्रयास भी है।

यह मामला धनबाद जिले के झरिया क्षेत्र से जुड़ा है, जहां वर्ष 2020 में एक दंपति का विवाह हुआ था। पत्नी ने आरोप लगाया कि शादी के तुरंत बाद ही वैवाहिक जीवन में तनाव शुरू हो गया। उसके अनुसार, एक रात जब वह सो रही थी, तब पति ने चुपके से उसका मोबाइल फोन खंगाला। मोबाइल के डिजिटल अकाउंट में मौजूद कुछ पुरानी निजी तस्वीरों को उसने बिना अनुमति अपने फोन में कॉपी कर लिया।

पत्नी का कहना था कि इसके बाद पति ने उन्हीं तस्वीरों को आधार बनाकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू किया। उसने न केवल तस्वीरें अपने परिजनों को दिखाईं, बल्कि सोशल मीडिया पर डालने की धमकी देकर पत्नी को डराने और दबाव में रखने की कोशिश भी की। इस पूरे व्यवहार से उसे लगातार अपमान और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति की निजी तस्वीरों तक अनधिकृत पहुंच बनाना और उनका इस्तेमाल भय या ब्लैकमेल के लिए करना गंभीर मानसिक उत्पीड़न है। अदालत ने टिप्पणी की कि पति द्वारा पत्नी की छवि को परिवार और समाज के सामने खराब करने का प्रयास असहनीय मानसिक यातना के समान है।

गौरतलब है कि इससे पहले फैमिली कोर्ट ने पत्नी की तलाक याचिका को खारिज कर दिया था। हालांकि हाईकोर्ट ने उस आदेश को पलटते हुए कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत क्रूरता की परिभाषा केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं है। किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, आत्मसम्मान और मानसिक शांति को ठेस पहुंचाना भी मानसिक क्रूरता का ठोस आधार है।

इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाया और पति के आचरण को तलाक के लिए वैध कारण माना। अदालत ने साफ किया कि वैवाहिक रिश्ते में भी निजता और सम्मान की रक्षा उतनी ही जरूरी है, जितनी किसी अन्य सामाजिक संबंध में।