नगर निकाय चुनाव से पहले आरक्षण सूची पर बवाल, धनबाद में चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

नगर निकाय चुनाव से पहले आरक्षण सूची पर बवाल, धनबाद में चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

नगर निकाय चुनाव से पहले आरक्षण सूची पर बवाल, धनबाद में चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jan 03, 2026, 2:21:00 PM

झारखंड में प्रस्तावित नगर निगम चुनावों से पहले राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आरक्षण रिपोर्ट ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। धनबाद जिले के वार्ड संख्या 36 और 44 में इस रिपोर्ट को लेकर गहरा असंतोष देखने को मिला, जहां स्थानीय लोगों ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए खुला विरोध दर्ज कराया।

बाटा मोड़ पर प्रदर्शन, आयोग का पुतला दहन

झरिया के बाटा मोड़ पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और राज्य निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। आक्रोशित नागरिकों ने आयोग का पुतला फूंका और सरकार व चुनाव आयोग विरोधी नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग थी कि आरक्षण से जुड़ा हालिया नोटिफिकेशन तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।

“ओबीसी को बांटने की साजिश” — प्रत्याशी का आरोप

वार्ड 44 से पार्षद पद के संभावित उम्मीदवार अरुण साव ने आरक्षण रिपोर्ट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह रिपोर्ट किसी सुविचारित नीति का नहीं, बल्कि एक साजिश और षड्यंत्र का नतीजा है। अरुण साव ने कहा कि ओबीसी समाज को BC-1 और BC-2 जैसे वर्गों में विभाजित करना न तो व्यावहारिक है और न ही सामाजिक रूप से उचित। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार और निर्वाचन आयोग ने अधिसूचना वापस नहीं ली, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसमें बाजार बंद और सड़क पर उतरने जैसे कदम भी शामिल होंगे।

“कागजी सर्वे, जमीनी हकीकत से दूर”

प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि वार्ड संख्या 36 और 44 को जानबूझकर ओबीसी-2 श्रेणी में शामिल किया गया है, जो वास्तविक सामाजिक संरचना के विपरीत है। उनका आरोप है कि जिस सर्वे के आधार पर आरक्षण रिपोर्ट तैयार की गई है, वह सिर्फ कागजों तक सीमित है और धरातल पर कोई वास्तविक सर्वेक्षण नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से ओबीसी समुदाय को विभाजित करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की।

अन्य राज्यों की तर्ज पर चुनाव कराने की मांग

स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि झारखंड में निकाय चुनाव उसी ढांचे पर कराए जाएं, जैसा अन्य राज्यों में होता है, ताकि किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव न हो। उनका आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था ओबीसी समुदाय के भीतर टकराव पैदा करने की कोशिश है।

चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने दो टूक कहा कि ओबीसी समाज को दो हिस्सों में बांटने का प्रयास किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।