देवघर स्थित एम्स में बर्न वार्ड के संचालन और वहां उपलब्ध उपचार सुविधाओं को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने अहम निर्देश जारी किया है। अदालत ने एम्स प्रबंधन को आदेश दिया है कि वह शपथ पत्र (एफिडेविट) दाखिल कर यह स्पष्ट करे कि अस्पताल में प्रतिदिन कितने बर्न मरीज पहुंचते हैं और उनके इलाज के लिए किस प्रकार की व्यवस्था मौजूद है।
राज्य सरकार से भी बर्न मरीजों की संख्या और इलाज व्यवस्था पर रिपोर्ट तलब
हाईकोर्ट ने केवल एम्स से ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार को भी निर्देश दिया है कि वह सरकारी अस्पतालों में आने वाले बर्न केस की संख्या और मरीजों के उपचार की वर्तमान व्यवस्था को लेकर विस्तृत जानकारी अदालत में प्रस्तुत करे। कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार, दोनों को 20 मार्च तक एफिडेविट दाखिल करने का समय दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 26 मार्च को निर्धारित की गई है।
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की जनहित याचिका पर सुनवाई
यह मामला भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा दाखिल जनहित याचिका के आधार पर अदालत के समक्ष आया है। जनहित याचिका पर सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ में हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता पीयूष चित्रेश ने पक्ष रखा।