चतरा में LPG संकट पर बवाल, उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसियों पर लगाया कालाबाजारी का आरोप

चतरा में LPG संकट पर बवाल, उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसियों पर लगाया कालाबाजारी का आरोप

चतरा में LPG संकट पर बवाल, उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसियों पर लगाया कालाबाजारी का आरोप
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 06, 2026, 11:56:00 AM

झारखंड के चतरा जिले में रसोई गैस को लेकर आम लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। स्थानीय स्तर पर गैस की कमी का हवाला दिया जा रहा है, जिसे कुछ लोग अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, जमीनी हालात इस दावे से अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।

उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस एजेंसियों और उनके कर्मचारियों की मिलीभगत से सिलेंडरों की अवैध तरीके से बिक्री की जा रही है। शहर और आसपास के इलाकों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि घरेलू उपयोग वाले सिलेंडर 2500 से 3000 रुपये तक में बेचे जा रहे हैं, जो निर्धारित कीमत से कहीं अधिक है।

लोगों का यह भी आरोप है कि गैस बुक कराने के बावजूद समय पर सिलेंडर की आपूर्ति नहीं हो रही। कई मामलों में उपभोक्ताओं के मोबाइल पर डिलीवरी का संदेश भेज दिया जाता है, जबकि उन्हें वास्तव में सिलेंडर प्राप्त नहीं होता। इस वजह से लोग एजेंसियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं और खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, वितरण में भी भेदभाव देखने को मिल रहा है। आरोप है कि कार से आने वाले ग्राहकों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि बाइक या पैदल आने वालों को नजरअंदाज किया जाता है। कुछ मामलों में यह भी कहा जा रहा है कि सिलेंडर गुप्त स्थानों से ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं और उन्हें छिपाकर ले जाने जैसी शर्तें भी रखी जा रही हैं।

इसके अलावा यह आरोप भी सामने आया है कि गैस सिलेंडरों को अधिकृत गोदामों के बजाय निजी जगहों पर जमा कर कृत्रिम अभाव पैदा किया जा रहा है। बड़े होटल और रेस्टोरेंट में इन सिलेंडरों की आपूर्ति कथित तौर पर अधिक कीमत पर की जा रही है, जिससे छोटे व्यवसायियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

हालांकि, जिला प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है। उपायुक्त कीर्ति श्री जी और पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि आपूर्ति पर्याप्त है और यदि कालाबाजारी की शिकायतें मिलती हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, उपभोक्ता प्रशासनिक हस्तक्षेप का इंतजार कर रहे हैं, जबकि एजेंसी संचालकों का कहना है कि उन्हें जितनी आपूर्ति मिल रही है, उसी के अनुसार वितरण किया जा रहा है। ऐसे में आम लोगों के लिए राहत कब मिलेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।