बोकारो : लापता युवती मामले में हाईकोर्ट ने जांच पर जताई नाराजगी, CBI जांच पर राज्य सरकार से मांगा जवाब

बोकारो : लापता युवती मामले में हाईकोर्ट ने जांच पर जताई नाराजगी, CBI जांच पर राज्य सरकार से मांगा जवाब

बोकारो : लापता युवती मामले में हाईकोर्ट ने जांच पर जताई नाराजगी, CBI जांच पर राज्य सरकार से मांगा जवाब
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jun 08, 2026, 12:51:00 PM

बोकारो की लापता युवती से जुड़े बहुचर्चित मामले की सुनवाई सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में हुई, जहां अदालत ने जांच की प्रगति को लेकर गंभीर असंतोष व्यक्त किया। न्यायमूर्ति एस.एन. प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की समीक्षा करते हुए पुलिस जांच के कई पहलुओं पर सवाल उठाए और जांच एजेंसियों से जवाब तलब किया।

सुनवाई के दौरान अदालत का मुख्य फोकस उन छह संदिग्धों के नार्को परीक्षण पर रहा, जिनके लिए पहले ही अनुमति दी जा चुकी है। कोर्ट ने पूछा कि जब परीक्षण की मंजूरी पहले दी जा चुकी थी, तब भी छठे व्यक्ति का नार्को टेस्ट अब तक क्यों नहीं कराया गया। इस प्रश्न के माध्यम से अदालत ने जांच की गति और प्रभावशीलता पर चिंता जताई।

मामले की सुनवाई के दौरान जांच को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का मुद्दा भी उठा। इस पर राज्य सरकार ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। हालांकि खंडपीठ ने सरकार से स्पष्ट रूप से पूछा कि CBI जांच का विरोध करने का आधार क्या है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि राज्य पुलिस की कार्यवाही क्षेत्राधिकार और प्रक्रियागत सीमाओं से बंधी होती है, जबकि CBI के पास अंतरराज्यीय स्तर पर जांच करने की अधिक स्वतंत्रता होती है। अदालत ने संकेत दिया कि केंद्रीय एजेंसी के शामिल होने से मामले में नई प्रगति संभव हो सकती है।

सुनवाई के दौरान बोकारो के पुलिस अधीक्षक (SP), संबंधित डीएसपी, विशेष जांच दल (SIT) के प्रमुख, पिंडराजोड़ा थाना प्रभारी तथा अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अदालत में उपस्थित रहे और जांच से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की।

यह मामला जुलाई 2025 से लापता एक 18 वर्षीय युवती से संबंधित है, जिसकी तलाश में अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी है। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि शुरुआती शिकायत के बावजूद पुलिस ने मामले को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद युवती की मां ने हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर कर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की।

जांच के हिस्से के रूप में युवती के माता-पिता के डीएनए नमूने एम्स देवघर से केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) भेजे गए हैं। वहीं, राज्य सरकार ने अदालत से आगे की कार्रवाई और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है।

खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है। इस बीच, अदालत की टिप्पणियों ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और मामले की दिशा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।