बोकारो की लापता युवती से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जांच प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि बरामद कंकाल की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उसका डीएनए परीक्षण केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल), कोलकाता में कराया जाए।
अदालत ने इस प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया को जिम्मेदारी सौंपी है। निर्देश दिया गया है कि नामकुम स्थित मिलिट्री अस्पताल में 48 घंटे के भीतर कंकाल और युवती के परिजनों के सैंपल एकत्र किए जाएं, ताकि उन्हें जल्द से जल्द जांच के लिए भेजा जा सके।
इसके साथ ही कोर्ट ने पोस्टमार्टम को लेकर भी स्पष्टता दी। खंडपीठ ने कहा कि कंकाल का पोस्टमार्टम जमशेदपुर में न कराकर रांची के रिम्स (RIMS) में कराया जाए, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय ढंग से संपन्न हो सके।
सुनवाई के दौरान राज्य के पुलिस और जांच से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी कोर्ट में उपस्थित रहे, जिनमें डीजीपी, आईजी बोकारो, डीआईजी, एसपी, विशेष जांच दल (SIT) के सदस्य और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक शामिल थे। अदालत की सख्ती से यह संकेत स्पष्ट है कि इस संवेदनशील मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई को स्वीकार नहीं किया जाएगा और जांच की हर कड़ी पर न्यायालय की पैनी नजर बनी रहेगी।