जिला अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं एवं सर्जरी प्रदर्शन, स्वास्थ्य सचिव ने की राज्यस्तरीय समीक्षा
राज्य के जिला अस्पतालों में मरीजों को सुलभ, त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने विभाग के डिजिटल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक की।

पटना: राज्य के जिला अस्पतालों में मरीजों को सुलभ, त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने विभाग के डिजिटल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से सभी जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान माननीय मुख्यमंत्री एवं माननीय स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश के आलोक में अनावश्यक रेफरल में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों तथा जिलों में रेफरल व्यवस्था की वर्तमान स्थिति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में बीएमएसआईसीएल के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन, स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारी, सभी जिलों के सिविल सर्जन, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, अस्पताल उपाधीक्षक, अस्पताल प्रबंधक, इमरजेंसी प्रभारी एवं विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हुए।
बैठक के दौरान जिला अस्पतालों के समग्र प्रदर्शन, आईपीडी में मरीजों के दाखिले, ईएचआर लिंकेज, एक्सीडेंट एंड इमरजेंसी सेवाओं, विभागवार एवं जिलावार सर्जरी, आयुष्मान भारत योजना की प्रगति, रेफरल व्यवस्था तथा चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और उपयोग की विस्तार से समीक्षा की गई।
समीक्षा में बताया गया कि सितंबर 2026 में राज्य के जिला अस्पतालों में कुल 49,450 मरीज आईपीडी में भर्ती हुए। जून में यह संख्या 26,443 और जुलाई में 36,680 थी, जबकि अगस्त में 49,973 मरीज भर्ती हुए थे। इससे स्पष्ट है कि जिला अस्पतालों में आईपीडी सेवाओं का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। सितंबर में आईपीडी दाखिले के मामले में मधेपुरा 8,037 मरीजों के साथ पहले स्थान पर रहा। इसके बाद बांका में 2,488, मुंगेर में 2,327, अररिया में 2,065 और सहरसा में 1,709 मरीज भर्ती हुए। वहीं जहानाबाद, शिवहर, भागलपुर, जमुई और नवादा में आईपीडी दाखिले अपेक्षाकृत कम पाए गए। मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से जोड़ने की भी समीक्षा की गई। सितंबर में पूरे राज्य में 4,413 ईएचआर लिंक किए गए। मधेपुरा में सर्वाधिक 1,787 रिकॉर्ड लिंक हुए। इसके बाद अररिया, पटना, गोपालगंज और वैशाली का प्रदर्शन बेहतर रहा। दूसरी ओर कटिहार में एक भी रिकॉर्ड लिंक नहीं होने तथा सहरसा, सिवान, सुपौल और सारण में बहुत कम प्रगति पर स्वास्थ्य सचिव ने नाराजगी जताते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
सितंबर माह में जिला अस्पतालों के एक्सीडेंट एंड इमरजेंसी विभागों में कुल 2,05,566 मरीजों का पंजीकरण हुआ। भोजपुर में सर्वाधिक 16,570 मरीजों ने इमरजेंसी सेवा प्राप्त की। इसके बाद सिवान, अररिया, वैशाली और मधेपुरा का स्थान रहा। वहीं लखीसराय, शेखपुरा, सहरसा, कटिहार और पटना में इमरजेंसी पंजीकरण अपेक्षाकृत कम दर्ज किया गया। स्वास्थ्य सचिव ने निर्देश दिया कि जिला अस्पतालों में 24×7 इमरजेंसी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और मरीजों को समय पर आवश्यक जांच एवं उपचार मिले।
बैठक में जून से सितंबर 2026 के बीच जिला अस्पतालों में विभिन्न विभागों में हुई सर्जरी की भी समीक्षा की गई। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में सर्जरी की संख्या जून के 2,156 से बढ़कर सितंबर में 6,131 हो गई। जनरल सर्जरी में यह संख्या 174 से बढ़कर 1,420 तथा ऑर्थोपेडिक्स में 25 से बढ़कर 1,408 हो गई। सितंबर में ईएनटी की 300, नेत्र रोग की 222 तथा दंत रोग से संबंधित 224 सर्जरी भी की गईं। जिला अस्पतालों में सर्जरी की संख्या में लगातार उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। जून में 2,428 सर्जरी हुई थीं, जो जुलाई में बढ़कर 5,650, अगस्त में 8,209 और सितंबर में 9,705 हो गईं। इस प्रकार जून की तुलना में सितंबर में सर्जरी की संख्या लगभग चार गुना बढ़ी है। सितंबर में कुल सर्जरी के मामले में मधेपुरा में 790, पटना में 710, वैशाली में 682, अररिया में 495 और सारण में 456 सर्जरी की गईं। वहीं शिवहर, अरवल, सहरसा, शेखपुरा और जमुई में सर्जरी की संख्या कम पाई गई।
विभिन्न प्रकार की सर्जरी करने के मामले में पटना में सर्वाधिक 52 प्रकार की सर्जरी हुईं। बेगूसराय में 42, भोजपुर में 32, नालंदा में 31 और मधुबनी में 25 प्रकार की सर्जरी की गईं। स्वास्थ्य सचिव ने कम प्रदर्शन वाले जिलों को उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों और संसाधनों का पूरा उपयोग करते हुए सर्जरी की संख्या एवं विविधता बढ़ाने का निर्देश दिया।
बैठक में बताया गया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रोसीजर और सर्जरी की संख्या पिछले माह के 1,728 से बढ़कर 2,098 हो गई है। इसके साथ ही क्लेम राशि में करीब 30 लाख रुपये की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि अरवल, जहानाबाद, पूर्णिया, शेखपुरा, शिवहर, समस्तीपुर, औरंगाबाद, बक्सर और सहरसा में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर स्वास्थ्य सचिव ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जिन सरकारी एवं सदर अस्पतालों का प्रदर्शन निजी अस्पतालों से कम है, वहां जवाबदेही तय की जाएगी। आयुष्मान भारत से प्राप्त राशि का उपयोग अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने तथा नियमानुसार चिकित्सकों को प्रोत्साहन राशि देने में किया जाएगा।
स्वास्थ्य सचिव ने पीएचसी, सीएचसी, अनुमंडलीय एवं जिला अस्पतालों को अपनी क्षमता के अनुसार स्थानीय स्तर पर ही मरीजों का उपचार करने का निर्देश दिया, ताकि अनावश्यक रेफरल को रोका जा सके। सभी सिविल सर्जन, अस्पताल उपाधीक्षक और अस्पताल प्रबंधकों को प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट की समीक्षा बैठक करने को कहा गया। साथ ही माननीय मुख्यमंत्री के निर्देश के आलोक में ‘कायाकल्प’ योजना के मानकों के अनुरूप स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए। अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की समयबद्ध उपस्थिति के लिए बायोमेट्रिक एवं ऐप-आधारित अटेंडेंस व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
बीएमएसआईसीएल के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि अक्टूबर माह में जिला अस्पतालों को जनरल सर्जरी ओटी के लिए 14 प्रकार, गायनी ओटी के लिए 17 प्रकार और ऑर्थो ओटी के लिए 16 प्रकार के उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा 14 स्थानों पर सी-आर्म मशीनें स्थापित की जा रही हैं। अधिकांश उपकरणों का इंस्टॉलेशन 15 से 20 अक्टूबर तक तथा शत-प्रतिशत इंस्टॉलेशन 31 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य है। सभी उपकरणों की KTL पोर्टल पर प्रविष्टि तथा एएमसी/सीएमसी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
बैठक के समापन पर स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने सभी जिलों को उपलब्ध डॉक्टरों, उपकरणों और अन्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों को ऐसी मजबूत स्वास्थ्य इकाई के रूप में विकसित किया जाए, जहां मरीजों को समय पर, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके।













