राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने पहली बार खुलकर यह स्वीकार किया है कि उन्होंने अपने बेटे दीपक प्रकाश को बिहार की नीतीश सरकार में मंत्री पद देने के पीछे राजनीतिक मजबूरी भी देखी है। उनका कहना है कि परिवार का कोई सदस्य महत्वपूर्ण पद पर रहता है, तो पार्टी टूटने या नेताओं के बिखरने का खतरा काफी कम हो जाता है। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में उनकी पार्टी कई बार टूट चुकी है और इसका नुकसान संगठन को भारी तरीके से उठाना पड़ा है। यही वजह है कि उन्होंने इस बार अपने बेटे को मंत्री बनाने का निर्णय लिया।
कुशवाहा ने बताया कि दीपक प्रकाश को मंत्री बनाने के पीछे एक कारण उनकी क्षमता और योग्यता भी है। लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा कारण राजनीतिक परिस्थितियां और पार्टी के भीतर टूट-फूट को रोकना है। उन्होंने कहा कि इससे पहले दो बार सांसद और विधायक उनके दल को छोड़कर जा चुके हैं। ऐसे में पार्टी को दोबारा खड़ा करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है और यह स्थिति किसी भी राजनीतिक दल के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होती है।
जब परिवार के लोग पद पर आते हैं, तो उनके कहीं और जाने का खतरा नहीं रहता। पार्टी फिर से कमजोर न हो, इसलिए यह कदम उठाया है।”
उपेंद्र कुशवाहा ने पुराने अनुभवों को याद करते हुए बताया कि 2014 में रालोसपा के तीन सांसद जीते थे, जिनमें से दो बाद में पार्टी छोड़कर चले गए। 2015 के विधानसभा चुनावों में दो विधायक चुने गए थे, लेकिन वे भी बाद में अलग होकर जदयू में शामिल हो गए। कुशवाहा ने कहा कि यह स्थिति केवल उनकी पार्टी में नहीं होती, बल्कि कई छोटी पार्टियां ऐसी दिक्कतों से गुजरती हैं। इसलिए उन्होंने परिवार से किसी को मंत्री बनाकर एक सुरक्षित रास्ता अपनाया है।
आरएलएम के कोटे से जो मंत्री बनाए गए हैं, वो दीपक प्रकाश वर्तमान में न तो विधायक हैं और न ही विधान परिषद के सदस्य। माना जा रहा है कि जल्द ही उन्हें विधान परिषद भेजा जाएगा। सूत्रों का कहना है कि एनडीए में सीट बंटवारे के दौरान भाजपा ने उपेंद्र कुशवाहा से एक एमएलसी सीट का वादा किया था, जिस पर अब अमल होने की संभावना है।
गुरुवार को पटना के गांधी मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और 25 अन्य मंत्रियों के साथ दीपक प्रकाश ने भी शपथ ली। शपथ लेने के बाद मीडिया से बातचीत में दीपक ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम करने का मौका मिला है, जो उनके लिए गौरव की बात है। मंत्री बनने का फैसला अचानक हुआ और इस जिम्मेदारी को वे पूरी ईमानदारी से निभाएंगे।