शिक्षकों को मिला मनचाहा जिला चुनने का अधिकार, पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार का आदेश रद्द, 6 हफ्ते का अल्टीमेटम

बिहार के हजारों शिक्षकों के लिए राहत की खबर है। पटना हाईकोर्ट के ताज़ा फैसले ने हजारों विशिष्ट शिक्षकों को बड़ी राहत दी। पटना हाईकोर्ट ने विशिष्ट शिक्षकों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए उन्हें अपने मनचाहे जिले में पदस्थापन का अधिकार बरकरार रखा है।

शिक्षकों को मिला मनचाहा जिला चुनने का अधिकार, पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार का आदेश रद्द, 6 हफ्ते का अल्टीमेटम
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
: May 14, 2026, 10:49:00 AM

बिहार के हजारों शिक्षकों के लिए राहत की खबर है। पटना हाईकोर्ट के ताज़ा फैसले ने हजारों विशिष्ट शिक्षकों को बड़ी राहत दी है।  पटना हाईकोर्ट ने विशिष्ट शिक्षकों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए उन्हें अपने मनचाहे जिले में पदस्थापन का अधिकार बरकरार रखा है। कोर्ट ने सरकार द्वारा नियम बदलकर नियुक्ति प्रक्रिया रोकने के आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि सरकार बाद में नियम बदलकर उनका यह अधिकार खत्म नहीं कर सकती। 

दरअसल, यह पूरा मामला बिहार के विशिष्ट शिक्षक भर्ती एवं पोस्टिंग प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है, जहां फरवरी 2024 में दक्षता परीक्षा पास करने वाले 350 से अधिक शिक्षकों ने अपनी नियुक्ति और जिला आवंटन को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। इन शिक्षकों ने सरकार के उस आदेश को चुनौती दी थी,  जिसमें उनकी नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी और उन्हें पुराने स्थान पर भेजने की बात कही गई थी।

 इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिन्हा एकलपीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि इन शिक्षकों को मनचाहा जिला चुनने का कानूनी अधिकार प्राप्त है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिया है कि आगामी 6 सप्ताह के भीतर सभी शिक्षकों के नियुक्ति पत्र बहाल किए जाएं और जिला आवंटन के अनुसार उनकी पदस्थापना सुनिश्चित की जाए।

हाईकोर्ट ने बिहार के प्राथमिक शिक्षा निदेशक द्वारा 21 दिसंबर 2024 को जारी उस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया, जिसमें शिक्षकों के नियुक्ति पत्र और पोस्टिंग प्रक्रिया को प्रभावित किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि जब चयन प्रक्रिया बिहार विशिष्ट शिक्षक नियमावली, 2023 के तहत पूरी हुई है, तो बाद में नियम बदलकर लाभ को सीमित करना कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है।

आपको बता दें कि बिहार सरकार ने वर्ष 2023 में 'विशिष्ट शिक्षक नियुक्ति और सेवा शर्त नियमावली' लागू की थी। इस नियम के तहत पहले से कार्यरत नियोजित शिक्षकों को एक दक्षता परीक्षा पास कर विशिष्ट शिक्षक बनने का अवसर दिया गया था। इस प्रक्रिया में शिक्षकों को यह सुविधा दी गई थी कि वे अपनी पसंद के तीन जिलों का विकल्प चुन सकते हैं, जहां वे अपनी सेवा देना चाहते हैं।

इसी नियम के आधार पर हजारों शिक्षकों ने परीक्षा दी और चयन प्रक्रिया पूरी हुई। इसके बाद कई शिक्षकों को औपबंधिक (प्रोविजनल) नियुक्ति भी प्रदान कर दी गई। इसके साथ ही उनकी पदस्थापन प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी, केवल स्कूल या जिले का अंतिम आवंटन बाकी था।

लेकिन बाद में सरकार ने इस प्रक्रिया में संशोधन करते हुए पहले जारी नियुक्ति पत्र रद्द कर दिए और शिक्षकों को पुराने कार्यस्थलों पर लौटने का निर्देश दे दिया। इसी फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि जब पूरी चयन प्रक्रिया एक तय नियमावली के तहत पूरी हो चुकी थी, तो बीच में नियम बदलकर उनके अधिकारों को खत्म करना प्राकृतिक न्याय और वैधानिक अधिकारों के खिलाफ है। अब पटना हाईकोर्ट ने विशिष्ट शिक्षकों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए उन्हें अपने मनचाहे जिले में पदस्थापन का अधिकार बरकरार रखा है।