बिहार में शिक्षकों के तबादले का नया नियम लागू, सबसे पहले इन टीचरों का ट्रांसफर, नई पोस्टिंग किसे, जानिए हर सवाल का जवाब

बिहार में शिक्षकों के तबादले को लेकर नया नियम लागू हो गया है। शिक्षा विभाग की ओर से स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए सात स्तर की प्राथमिकता तय की गई है, जिनके आधार पर शिक्षकों को वरीयता दी जाएगी।

बिहार में शिक्षकों के तबादले का नया नियम लागू, सबसे पहले इन टीचरों का ट्रांसफर, नई पोस्टिंग किसे, जानिए हर सवाल का जवाब
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
: Jun 26, 2026, 12:41:00 PM

bihar teacher transfer new policy/bihar teacher transfer policy 2026: बिहार में शिक्षकों के तबादले को लेकर नया नियम लागू हो गया है। सम्राट सरकार ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के तबादले की नई नियमावली लागू कर दी है। शिक्षा विभाग की ओर से नई ट्रांसफर नीति जारी कर दी गई है। अब शिक्षकों का ट्रांसफर पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी और तय नियमों के अनुसार होगा। शिक्षा विभाग की ओर से स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए सात स्तर की प्राथमिकता तय की गई है, जिनके आधार पर शिक्षकों को वरीयता दी जाएगी। नई व्यवस्था प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों के नियमित शिक्षकों, प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों पर लागू होगी। 

नई नियमावली के मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में 5 साल की सेवा पूरी होने के बाद ही शिक्षकों का ट्रांसफर होगा। इच्छुक शिक्षक हर साल मार्च में ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे और जून तक ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हालांकि सिर्फ आवेदन कर देने से ही शिक्षकों का ट्रांसफर नहीं होगा। बल्कि विभाग रिक्त पद, शिक्षक-छात्र अनुपात, विषयवार जरूरत और छात्रों के शैक्षणिक हित को ध्यान में रखकर फैसला करेगा। 

शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए विभाग ने कुल 7 श्रेणियां निर्धारित की हैं। सबसे पहले गंभीर बीमारी वाले शिक्षकों को मौका मिलेगा। असाध्य रोग और गंभीर चिकित्सा स्थिति से जूझ रहे शिक्षकों को सबसे ऊपर रखा गया है। ऐसे शिक्षकों के आवेदन पर सबसे पहले विचार किया जाएगा। इसके बाद दिव्यांग शिक्षकों के ट्रांसफर को प्राथमिकता मिलेगी।

तीसरे नंबर पर पति-पत्नी के आधार पर तबादले का प्रावधान रखा गया है। यदि पति और पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं और अलग-अलग स्थानों पर कार्यरत हैं तो उन्हें एक जगह या नजदीकी स्थान पर पोस्टिंग देने को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद विधवा महिला शिक्षकों, कानूनी रूप से अलग रह रही महिला शिक्षकों और एकल अभिभावक शिक्षकों को प्राथमिकता मिलेगी।

नई नीति में पारस्परिक स्थानांतरण यानी म्युचुअल ट्रांसफर को 5वें नंबर पर रखा गया है। इसके बाद विभागीय जरूरत के अनुसार समायोजन और समानुपातीकरण किया जाएगा। सबसे आखिर में सामान्य स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यानी जिन शिक्षकों को किसी विशेष प्राथमिकता श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है, उनका तबादला सामान्य प्रक्रिया के तहत होगा।

ट्रांसफर में यह रहेगा प्राथमिकता का क्रम

असाध्य रोग और गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षक

दिव्यांग शिक्षक

पति-पत्नी के आधार पर स्थानांतरण

विधवा, कानूनी रूप से पृथक महिला और एकल अभिभावक शिक्षक

पारस्परिक (म्युचुअल) ट्रांसफर

समायोजन और समानुपातीकरण

सामान्य स्थानांतरण

 नई नीति में महिला और पुरुष शिक्षकों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग नियम बनाए हैं। महिला शिक्षकों को उनके अनुरोध पर गृह प्रखंड में पोस्टिंग पर विचार किया जाएगा। वहीं पुरुष शिक्षकों को गृह जिले में पोस्टिंग देने की व्यवस्था होगी।  हालांकि किसी भी शिक्षक को उसके गृह पंचायत या गृह वार्ड में पदस्थापित नहीं किया जाएगा। वहीं अगर यदि एक ही स्कूल के लिए कई शिक्षक आवेदन करते हैं तो चयन अंक आधारित प्रणाली से होगा। सेवा अवधि, कठिन क्षेत्र में काम करने का अनुभव और विशेष परिस्थितियों के आधार पर अंक दिए जाएंगे।

नई नीति के तहत शिक्षकों को तबादले के लिए कई विकल्प देने की व्यवस्था भी की गई है। शिक्षक अपनी पसंद के स्थानों का चयन कर सकेंगे। विभाग उपलब्ध रिक्तियों और प्राथमिकता क्रम के आधार पर अंतिम निर्णय लेगा। स्थानांतरण प्रक्रिया की निगरानी के लिए जिला, प्रमंडल और राज्य स्तर पर स्थापना समितियां बनाई जाएंगी। जिला स्तर की छह सदस्यीय समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी होंगे, जबकि जिला शिक्षा पदाधिकारी सदस्य सचिव रहेंगे। अंतर-जिला और विशेष मामलों का फैसला प्रमंडलीय समिति करेगी, जिसकी अध्यक्षता प्रमंडलीय आयुक्त करेंगे।

बता दें कि सिर्फ स्वैच्छिक आवेदन ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक आधार पर भी शिक्षकों का स्थानांतरण किया जा सकेगा। यदि किसी स्कूल में शिक्षक-छात्र अनुपात बिगड़ जाता है, वित्तीय गड़बड़ी का मामला आता है, अनुशासनहीनता होती है, लगातार अनुपस्थिति रहती है या महिला शिक्षकों और छात्राओं से दुर्व्यवहार की शिकायत मिलती है, तो विभाग प्रशासनिक आधार पर ट्रांसफर कर सकेगा।  ऐसे मामलों में संबंधित शिक्षक को सामान्य तौर पर सात कार्य दिवस के भीतर अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। बतातें चलें कि शिक्षकों का आवेदन, स्कूल का चयन, समिति की अनुशंसा, स्थानांतरण आदेश और अपील तक की पूरी प्रक्रिया विभागीय पोर्टल के माध्यम से होगी।