बिहार के शिवहर जिले में सड़क दुर्घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फतेहपुर के पास हुए एक हादसे में पुलिस विभाग के दारोगा श्यामलाल गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जा रहा है कि एक तेज रफ्तार चारपहिया वाहन के नियंत्रण खो देने के कारण उनकी गाड़ी को टक्कर लगी, जिससे उनके पैर में कई स्थानों पर फ्रैक्चर हो गया।
घटना के तुरंत बाद उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक चिकित्सा के दौरान जो तरीका अपनाया गया, उसने वहां मौजूद लोगों को चौंका दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डॉक्टरों ने पारंपरिक प्लास्टर या आधुनिक उपकरणों की बजाय घायल पैर को सहारा देने के लिए गत्ते और सलाइन पाइप का उपयोग किया। यह दृश्य सामने आने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
घायल दारोगा ने भी बताया कि दुर्घटना मधुबन मार्ग की मुख्य सड़क पर हुई, जहां अचानक एक तेज रफ्तार वाहन ने उनकी गाड़ी को टक्कर मार दी। हादसे की खबर मिलते ही पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंच गए। इस दौरान अस्पताल में मौजूद लोगों ने अव्यवस्था और संसाधनों की कमी को लेकर नाराजगी जताई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब एक पुलिस अधिकारी के इलाज में इस तरह की अस्थायी व्यवस्था की जा रही है, तो आम मरीजों को किस तरह की सुविधाएं मिलती होंगी, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। इस घटना ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है।
हालांकि, इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. दीपक कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि घायल के पैर में कई जगह गंभीर फ्रैक्चर था, जिसके चलते तत्काल प्लास्टर करना संभव नहीं था। उन्होंने बताया कि मरीज को अस्थायी राहत देने के लिए यह व्यवस्था की गई और बाद में बेहतर उपचार के लिए उसे सीतामढ़ी रेफर कर दिया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
इधर, मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी प्रतिभा रानी ने जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्राथमिक उपचार के दौरान पैर को स्थिर रखने के लिए वैकल्पिक साधनों का उपयोग किया गया था। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता को भी स्वीकार किया है।