पूर्वी बिहार और सीमांचल के करोड़ों लोगों की जीवनरेखा माना जाने वाला विक्रमशिला सेतु इस वक्त बड़े खतरे के मुहाने पर खड़ा है. गंगा की लहरों के बीच टिके इस महासेतु के पिलरों को सुरक्षा देने वाली प्रोटेक्शन वॉल ताश के पत्तों की तरह बिखरने लगी है. सबसे डराने वाली स्थिति पिलर संख्या 16 से 20 के बीच देखी जा रही है, जहां दीवार का भारी हिस्सा पिलर से लटककर लगातार उससे टकरा रहा है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए भागलपुर डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने संज्ञान लिया है. उन्होंने कहा, 'मैंने कार्यपालक अभियंता को तुरंत इंक्वायरी के लिए बोला है. रिपोर्ट के आधार पर अगर जरूरत पड़ी तो डिपार्टमेंट से कंसल्ट कर तुरंत एक्सपर्ट टीम बुलाई जाएगी. टीम के निर्णय के आधार पर ही आवागमन और मरम्मत की कार्रवाई की जाएगी.'
वहीं, पूर्व कांग्रेस विधायक अजीत शर्मा ने सरकार की नियत पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि पुल के एक्सपेंशन जॉइंट्स का गैप 2 साल में 2 इंच से बढ़कर 6 इंच हो गया है. उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम समृद्धि यात्रा में भागलपुर आए, लेकिन उन्होंने इस पुल की तरफ देखा तक नहीं. लाखों की जान खतरे में है, लेकिन पुल निर्माण निगम सो रहा है. समानांतर फोर-लेन पुल का काम भी कछुए की गति से चल रहा है.'