राजधानी के गांधी मैदान में लगा सरस मेला अब अपने समापन की ओर है। यह मेला रविवार को औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगा। बीते 22 दिनों से चल रहे इस मेले ने न केवल लोगों का भरपूर मनोरंजन किया, बल्कि ग्रामीण उत्पादों और हस्तशिल्प को बड़ा बाज़ार भी दिया। अब तक मेले में करीब 28 करोड़ रुपये का कारोबार हो चुका है, जो इसकी सफलता को दर्शाता है।
सरस मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आए स्वयं सहायता समूहों और कारीगरों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया। हस्तशिल्प, लोक कलाएं और पारंपरिक कलाकृतियों की जमकर बिक्री हुई। मेले में सबसे अधिक भीड़ व्यंजनों के स्टॉल पर देखने को मिल रही है, जहाँ बिहार के पारंपरिक व्यंजन के साथ-साथ अन्य राज्यों के स्वादिष्ट पकवान लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
इसके अलावा ऊनी कपड़ों के स्टॉल पर भी खासा उत्साह देखा जा रहा है, खासकर ठंड के मौसम को देखते हुए लोगों ने जमकर खरीदारी की। चूड़ा-तिलकुट और फर्नीचर के स्टॉल भी लोगों की पसंद बने हुए हैं। महिलाएं बड़ी संख्या में आर्टिफिशियल ज्वेलरी, साड़ियां, और घर की सजावट के लिए आर्टिफिशियल फ्लावर खरीद रही हैं।
इस मेले की खास बात यह है कि यहां स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ग्रामीण महिला उद्यमी अपने हाथों से बनाए गए उत्पाद खुद अपने स्टॉल पर बेच रही हैं। इससे न केवल उन्हें आर्थिक लाभ हो रहा है, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिल रहा है।
मेले में आने वाले लोगों का कहना है कि सरस मेला ग्रामीण संस्कृति, कला और स्वाद को एक ही मंच पर देखने और अनुभव करने का बेहतरीन अवसर है।
रविवार को आयोजित समापन समारोह में ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। समापन के साथ ही यह मेला यादगार अनुभव छोड़ जाएगा और ग्रामीण उत्पादों को नई पहचान देकर समाप्त होगा।