पवित्र निर्जला एकादशी आज, जातक इन बातों का रखें ख्याल, तभी मिलेगा व्रत का पुण्य
हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को अत्यंत पुण्य और पवित्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जल का त्याग करने, भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने से विशेष पुण्य मिलता है। निर्जला एकादशी के दिन दान करने को भी अत्यंत फलदाई माना जाता है। यह भी मान्यता है कि छाता, वस्त्र, जल और अन्य दान करने से इस दिन विशेष पुण्य मिलता है। निर्जला एकादशी को लेकर के महिलाओं और श्रद्धालुओं में विशेष श्रद्धा रहती है। इस दिन पूजा पाठ से लेकर मुहूर्त तक का विशेष ख्याल रखा जाता है। किसी भी प्रकार की ऐसी गलती नहीं की जाती है, जिससे श्रद्धा पर कोई असर पड़े।
दरअसल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही निर्जला एकादशी, भीमसेन एकादशी या पांडव एकादशी के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि हर महीने आने वाली एकादशी व्रत को जो जातक नहीं रख पाते हैं, वह निर्जला एकादशी व्रत रखकर सभी 24 एकादशी का फल प्राप्त कर सकते हैं। वैदिक पंचांग की माने तो 25 जून 2026 को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस व्रत को कठिन व्रत में एक गिना जाता है। इस व्रत में जातक को जल का ग्रहण नहीं करना होता है। इसके नियम कठोर होते हैं। निर्जला एकादशी यानी बिना जल वाली एकादशी मानी जाती है। इस व्रत को रखने वाले जातक सुर्योदय से लेकर अगले दिन की द्वादशी तक जल का सेवन नहीं करते हैं। यहां तक की इस व्रत को रखने वालों जातकों को कुल्ला करने के वक्त भी विशेष सावधानी रखनी पडती है। हालांकि यह भी मान्यता है कि बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग या फिर वैसे जातक जो बीमार हैं, वह अपने सेहत को बिना किसी परेशानी में डाले सावधानी के साथ इस व्रत को रख सकते हैं।
शास्त्रों के अनुसार चावल का सेवन, एकादशी की तिथि पर पूरी तरीके से वर्जित होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन चावल खाने से व्यक्ति रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म लेता है। अतः जिस घर में जो जातक निर्मला निर्जला एकादशी के दिन व्रत नहीं रखे हैं, उन्हें भी यह सतर्कता बरतनी चाहिए और घर में चावल बनाने और खाने से बचना चाहिए। तुलसी के पौधे को सनातन संस्कृति में पवित्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन होता है। विष्णु जी की पूजा बिना तुलसी के पत्ते की अधूरी मानी जाती है। लेकिन इस एकादशी में तुलसी के पत्ते को तोड़ना, स्पर्श करना या जल चढ़ाना वर्जित माना जाता है।
निर्जला एकादशी के दिन भूलकर भी मांस, मदिरा, अंडा, लहसुन, प्याज से बनी चीजों का सेवन न करें। इस व्रत के दिन का पूरा माहौल सात्विक होना चाहिए साथ ही साथ मसूर की दाल, बैगन जैसी चीजों से भी दूरी बनाकर रहनी चाहिए निर्जला एकादशी के दिन किसी पर तेज आवाज में बात करना, गुस्सा करना, झूठ बोलना या घर की कलह इसके पुण्य को शून्य कर देता है। साथ ही साथ आज के दिन पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य होता है।