फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर आज बिहार में खंडग्रास चंद्रग्रहण लग रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह इस वर्ष भारत में दिखाई देने वाला पहला और अंतिम चंद्रग्रहण माना जा रहा है। ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है, इसलिए इसका सूतक आज सुबह 8 बजकर 50 मिनट से प्रारंभ हो चुका है।
ज्योतिषाचार्य राकेश झा के अनुसार यह खंडग्रास चंद्रग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में लग रहा है। ग्रहण का समय आज शाम 5 बजकर 50 मिनट से 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। लगभग एक घंटे तक चलने वाला यह ग्रहण पूरे भारत में देखा जा सकेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप और भगवान का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
चंद्रग्रहण के समय और इसके समाप्त होने के बाद पवित्र जल से स्नान करने का विशेष महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस समय स्नान करने से एक हजार वाजस्नेय यज्ञ के बराबर पुण्यफल की प्राप्ति होती है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान-दान और धार्मिक कार्य करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
ग्रहण को लेकर पटना स्थित प्रसिद्ध महावीर मंदिर का पट लगभग सात घंटों के लिए बंद रहेगा। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रखने और भोजन न बनाने की परंपरा भी निभाई जाती है।
दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन गुरु, ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को गेहूं, धान, चना, मसूर दाल, गुड़, अरवा चावल, सफेद या गुलाबी वस्त्र, चूड़ा, चीनी और चांदी या स्टील की कटोरी में खीर दान करना उत्तम माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।