एयरपोर्ट और वेटनरी मैदान के पास की हवा सेहत के लिए खराब, सांस लेना भी खतरनाक

एयरपोर्ट और वेटनरी मैदान के आसपास की हवा लगातार खराब रह रही है। इन इलाकों में रहने वाले लोग सबसे अधिक प्रदूषित हवा में सांस ले रहे है।

एयरपोर्ट और वेटनरी मैदान के पास की हवा सेहत के लिए खराब, सांस लेना भी खतरनाक
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Dec 14, 2025, 12:57:00 PM

एयरपोर्ट और वेटनरी मैदान के आसपास की हवा लगातार खराब रह रही है। इन इलाकों में रहने वाले लोग सबसे अधिक प्रदूषित हवा में सांस ले रहे है। शनिवार को वेटनरी मैदान और एयरपोर्ट के पास एक्यूआई लेवल 333 रहा। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मानक के मुताबिक, जहां का एक्यूआई लेवल 300 से अधिक है, वहां की हवा लोगों के स्वास्थ्य के लिए बहुत खराब है। वायु प्रदूषण विशेषज्ञ रविरंजन सिन्हा के मुताबिक, लोग धूल-कण शरीर के अंदर ले रहे हैं। जैसे-जैसे हवा में नमी और धुंध बढ़ेगी, प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है।

वेटनरी मैदान और एयरपोर्ट क्षेत्र में AQI 333 रिकॉर्ड किया गया, जो सीधे तौर पर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की ओर इशारा करता है. पटना सिटी में यह स्तर 273 रहा, जबकि दानापुर में 226, तारामंडल क्षेत्र में 225 और ईको पार्क के आसपास 174 दर्ज किया गया. अपेक्षाकृत बेहतर माने जाने वाले गांधी मैदान इलाके में भी AQI 151 रहा, जो अब भी ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है.

हवा में मौजूद सूक्ष्म धूल-कण लगातार लोगों के फेफड़ों में जा रहे हैं. ठंड के मौसम में नमी और धुंध बढ़ने से ये कण हवा में ज्यादा देर तक टिके रहते हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है. बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए यह स्थिति खासतौर पर खतरनाक है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. डॉक्टरों का कहना है कि जब एक्यूआई 300 के पार पहुंचता है तो हवा खतरनाक हो जाती है. आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और सिरदर्द जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. फेफड़े और हृदय रोगियों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरा रहता है. ऐसे लोगों को बाहर निकलने से बचना चाहिए और जरूरत पड़ने पर मास्क का उपयोग करना चाहिए.

पटना के आसपास के ग्रामीण इलाकों में पराली जलाना भी प्रदूषण बढ़ने का बड़ा कारण बनता जा रहा है. नौबतपुर, बिहटा, विक्रम, मसौढ़ी और फतुहा जैसे क्षेत्रों में हार्वेस्टर से धान कटाई के बाद पुआल जलाया जा रहा है. इससे कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड और मिथेन जैसी हानिकारक गैसें वातावरण में फैल रही हैं. इसके बावजूद कृषि विभाग, जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नियमित मॉनिटरिंग पर सवाल उठ रहे हैं.