बिहार में ऊर्जा क्रांति की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार ने परमाणु ऊर्जा परियोजना को प्राथमिकता देते हुए कई जिलों में सर्वे का काम आगे बढ़ा दिया है। बांका और नवादा में संभावित स्थलों का पहला चरण का सर्वे पूरा हो चुका है, जबकि सीवान में जमीन और जल स्रोतों का विस्तृत आकलन जारी है।
नवादा जिले के रजौली में करीब 20 हजार करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित करने की योजना है। इसके अलावा बांका के शंभूगंज और भितिया क्षेत्र को भी तकनीकी रूप से उपयुक्त पाया गया है। यह परियोजना सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि औद्योगिक निवेश, स्थानीय रोजगार और आधारभूत ढांचे के विकास को भी बढ़ावा देगी।
ऊर्जा के विविधीकरण की दिशा में लखीसराय के कजरा में 1231 एकड़ में बड़े पैमाने पर सोलर पावर प्लांट विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही ग्रीनको और सन पेट्रोकेमिकल्स द्वारा करीब 13 हजार करोड़ रुपये के निवेश से पंप स्टोरेज परियोजनाएं तैयार की जा रही हैं, जो अतिरिक्त बिजली को सुरक्षित रखकर जरूरत के समय आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी।
इन पहलों का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि भारत ने 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है। वर्तमान में देश की लगभग 75 प्रतिशत बिजली जरूरतें कोयला आधारित स्रोतों से पूरी होती हैं। ऐसे में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर जैसे छोटे, सुरक्षित और किफायती परमाणु विकल्प भविष्य की स्वच्छ और स्थिर ऊर्जा व्यवस्था की मजबूत नींव बन सकते हैं।
बिहार की यह पहल न सिर्फ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि राज्य को हरित और सतत विकास के नए दौर में प्रवेश कराने की तैयारी भी है।